शिमला। हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की हालिया बैठक में कई दूरगामी और महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। सबसे प्रमुख फैसला नशाखोरी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए लिया गया है। अब राज्य में ऐसे व्यक्ति पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे, जिनके खिलाफ ‘चिट्टे’ (सिंथेटिक ड्रग्स) से संबंधित मामले दर्ज हैं या जिनकी चार्जशीट अदालत में दाखिल हो चुकी है। मंत्रिमंडल ने स्पष्ट किया है कि भले ही अदालत ने अभी आरोपी को दोषी करार न दिया हो, लेकिन चिट्टे के मामले में नाम होने मात्र से वह चुनावी प्रक्रिया से बाहर हो जाएगा। हालांकि, अन्य मादक पदार्थों से जुड़े मामलों के आरोपियों को फिलहाल इस पाबंदी से बाहर रखा गया है।
इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए सरकार विधानसभा में जल्द ही एक विधेयक पेश करेगी। राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही यह नियम आगामी पंचायत चुनावों पर प्रभावी हो जाएगा। प्रदेश में पहली बार इस तरह की व्यवस्था लागू की जा रही है। सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, राज्य में 31 मई से पहले पंचायत चुनाव संपन्न होने हैं। इसके लिए प्रशासन को 30 मार्च तक आरक्षण रोस्टर और अन्य सभी चुनावी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान में परिसीमन की प्रक्रिया के साथ-साथ मतदाता सूचियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
बैठक में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर भी चर्चा हुई। सरकार अब पाइप के जरिए घरों तक गैस पहुंचाने की ‘सिटी गैस सिस्टम डिस्ट्रीब्यूशन’ योजना को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेगी। वर्तमान में यह सुविधा केवल ऊना के कुछ हिस्सों में है, लेकिन अब सोलन के बद्दी और नालागढ़ जैसे क्षेत्रों में भी इस पर तेजी से काम किया जा रहा है। साथ ही, ग्राम सभा के कोरम में भी बदलाव किया गया है। पहले कोरम के लिए एक-चौथाई सदस्यों की आवश्यकता थी, जिसे अब बढ़ाकर कुल मतदाताओं का दसवां हिस्सा (1:10) कर दिया गया है। 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी मतदाता ग्राम सभा की बैठक में भाग लेने के पात्र होंगे।
शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए सीबीएसई से संबद्ध सरकारी स्कूलों का एक अलग कैडर बनाने का निर्णय लिया गया है। पहले ऐसे स्कूलों की संख्या 134 तय की गई थी, जिसे अब बढ़ाकर 151 कर दिया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए टांडा मेडिकल कॉलेज में पेट स्कैन मशीन की खरीद को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा, आईजीएमसी शिमला, मंडी स्थित नेरचौक मेडिकल कॉलेज और हमीरपुर में नए बायोफिजिक्स विभाग स्थापित किए जाएंगे। नाहन मेडिकल कॉलेज की सब-कमेटी के गठन को भी स्वीकृति मिल गई है। रोजगार के मोर्चे पर कैबिनेट ने 6 विद्या उपासकों को जेबीटी बनाने का फैसला लिया है, जिससे इन कर्मियों को बड़ी राहत मिलेगी। इन सभी निर्णयों से राज्य के प्रशासनिक, सामाजिक और स्वास्थ्य ढांचे में बड़े सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।