Himachal: हिमाचल बजट 2026-27 में पहली बार घटा बजट का आकार 

शिमला। हिमाचल प्रदेश के बजट इतिहास में पहली बार बजट के कुल आकार में कमी देखी गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए गए बजट का आकार घटकर 54,928 करोड़ रुपये रह गया है। पिछले वर्ष यह आंकड़ा 58,514 करोड़ रुपये था, जिसका अर्थ है कि पिछले साल के मुकाबले इस बार के बजट में 3,586 करोड़ रुपये की कटौती हुई है।

बजट के आकार में आई इस कमी का सबसे मुख्य कारण केंद्र सरकार से मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) का बंद होना माना जा रहा है। सुक्खू ने अपने बजट भाषण के दौरान इस बात को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि आरडीजी बंद होने से राज्य की वित्तीय स्थिति पर सीधा असर पड़ा है। इस कारण अब सरकार के सामने अपने सीमित संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। बजट का आकार कम होने के कारण अब सरकार को अपने खर्चों में काफी मितव्ययिता बरतनी होगी। इसके तहत सरकार आने वाले समय में अपने खर्चों में कटौती करने के साथ-साथ कुछ अनुपयोगी संस्थानों को बंद करने जैसे कड़े निर्णय भी ले सकती है।

वित्तीय संसाधनों की इस कमी के बावजूद, सरकार ने विकास कार्यों को पूरी तरह रोकने के बजाय उन्हें अधिक सुव्यवस्थित और प्राथमिकता के आधार पर चलाने पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य में ऐसे विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी जिनका कम से कम 70 प्रतिशत काम पहले ही पूरा हो चुका है। ऐसे लगभग 300 प्रोजेक्ट्स को इसी वर्ष के भीतर पूरा कर जनता को समर्पित करने के लिए 500 करोड़ रुपये का विशेष बजट प्रविधान किया गया है। इसके अलावा, प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए यह भी कहा है कि पिछली सरकार के कार्यकाल में निर्मित जो सरकारी भवन फिलहाल खाली पड़े हैं और उपयोग में नहीं आ रहे हैं, अब उनका सामुदायिक हित में उपयोग किया जाएगा।

किसानों और पशुपालकों के लिए इस बजट में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने गाय और भैंस के दूध के खरीद मूल्य में 10 रुपये प्रति लीटर की ऐतिहासिक बढ़ोतरी करने की घोषणा की है। इस फैसले के बाद अब पशुपालकों को गाय के दूध के लिए 51 रुपये के बजाय 61 रुपये प्रति लीटर की कीमत मिलेगी। इसी प्रकार, भैंस के दूध का खरीद मूल्य भी 61 रुपये से बढ़ाकर अब 71 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। सरकार के इस कदम का सीधा उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करना और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाना है। वित्तीय चुनौतियों के बीच पेश किए गए इस बजट में सरकार ने आम आदमी और किसानों के हितों को सर्वोपरि रखने का प्रयास किया है।

 

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