देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में हर दिन बढ़ते ट्रैफिक और पार्किंग की गंभीर समस्या को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के बाद आवास विभाग ने शहर के दो सबसे व्यस्त इलाकों में अंडरग्राउंड पार्किंग बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। बुधवार को सचिवालय में आवास विभाग के सचिव आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में इन परियोजनाओं के ब्लूप्रिंट पर विस्तृत चर्चा की गई। इस पहल का मुख्य उद्देश्य शहर के मुख्य मार्गों जैसे राजपुर रोड, सुभाष रोड और लैंसडाउन चौक को पार्किंग के बोझ से मुक्त कर यातायात को सुगम बनाना है।
परेड ग्राउंड और गांधी पार्क के बीच 60 करोड़ की परियोजना
लोक निर्माण विभाग द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव के अनुसार, परेड ग्राउंड और गांधी पार्क के मध्य लगभग 6500 वर्गमीटर क्षेत्र में एक भव्य अंडरग्राउंड पार्किंग का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत 60 करोड़ रुपये तय की गई है। इस पार्किंग के बनने से शहर के बीचों-बीच लगभग 390 वाहनों को खड़ा करने की सुरक्षित जगह मिलेगी। इसके विकसित होने के बाद ऐस्ले हॉल, राजपुर रोड और सचिवालय के आसपास की सड़कों पर लगने वाले जाम से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। यह पार्किंग आधुनिक शहरी नियोजन और पर्यावरणीय मानकों को ध्यान में रखते हुए तैयार की जाएगी।
ट्रैफिक प्रबंधन और एनओसी पर विशेष निर्देश
आवास सचिव ने बैठक में स्पष्ट किया कि निर्माण कार्य के दौरान शहर की यातायात व्यवस्था किसी भी हाल में प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने लोक निर्माण विभाग को परिवहन विभाग, ट्रैफिक पुलिस और एमडीडीए के साथ मिलकर एक ठोस ‘ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान’ बनाने के निर्देश दिए हैं। इसके अतिरिक्त, इस परियोजना को धरातल पर उतारने से पहले खेल विभाग और नगर निगम से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त करने की प्रक्रिया को भी जल्द पूरा करने को कहा गया है। पार्किंग शुल्क का निर्धारण भी अन्य सरकारी पार्किंग स्थलों के आधार पर ही किया जाएगा।
सचिवालय क्षेत्र की पार्किंग योजना पर पुनर्विचार
बैठक में सचिवालय के राजपुर रोड की ओर स्थित भूमि पर भी एक अंडरग्राउंड पार्किंग का प्रस्ताव रखा गया। इस योजना की लागत 68 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें 189 वाहनों के खड़े होने की क्षमता है। हालांकि, आवास सचिव ने इस पर आपत्ति जताई क्योंकि यहां प्रति वाहन पार्किंग की लागत लगभग 35 लाख रुपये आ रही है, जो काफी अधिक है। उन्होंने विभाग को इस प्रोजेक्ट की लागत की दोबारा समीक्षा करने के निर्देश दिए। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा कि यह पार्किंग केवल सचिवालय कर्मियों के लिए होगी या आम जनता भी इसका लाभ उठा सकेगी।
मॉडल प्रोजेक्ट के रूप में होगा विकास
आवास सचिव आर. राजेश कुमार ने बताया कि देहरादून के लिए यह परियोजनाएं एक मॉडल प्रोजेक्ट के रूप में विकसित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान केवल कंक्रीट का ढांचा खड़ा करने पर नहीं, बल्कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने पर भी है। इन पार्किंग स्थलों में हरित क्षेत्र और पारिस्थितिकी संतुलन का विशेष ध्यान रखा जाएगा। आगामी बैठकों में सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ चर्चा के बाद डिजाइन, संचालन मॉडल और समय-सीमा पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी। सरकार का प्रयास है कि इन योजनाओं को जल्द से जल्द धरातल पर उतारा जाए ताकि देहरादून की जनता को रोज-रोज के ट्रैफिक जाम से हमेशा के लिए निजात मिल सके।
बैठक में प्रमुख अभियंता आर.सी. शर्मा, मुख्य अभियंता रणजीत सिंह, अधीक्षण अभियंता ओमपाल सिंह और प्रोजेक्ट मैनेजर प्रवीण कुश सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर अपने तकनीकी सुझाव साझा किए।