Himachal: चंबा में मनरेगा घोटाले पर विजिलेंस का शिकंजा 55 लाख के गबन की जांच के लिए रिकॉर्ड कब्जे में लेगी टीम

चंबा। हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा में मनरेगा कार्यों के नाम पर सरकारी धन के बड़े दुरुपयोग का मामला गरमा गया है। वनमंडल चंबा और चुराह की तीन वन रेंजों में हुए लगभग 55 लाख रुपये के कथित गबन को लेकर स्टेट विजिलेंस ने अपनी जांच तेज कर दी है। इस घोटाले के संबंध में 29 जुलाई को एफआईआर दर्ज करने के बाद अब जांच एजेंसी संबंधित रेंजों के महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों को अपने कब्जे में लेने की तैयारी कर रही है। इसमें भुगतान से जुड़ी फाइलें, तकनीकी स्वीकृतियां, मस्टररोल और सामग्री खरीद के बिलों की गहराई से पड़ताल की जाएगी।

दो साल पहले हुई थी शिकायत
इस भ्रष्टाचार की जड़ें साल 2022 में हुए विकास कार्यों से जुड़ी हैं। उस समय उपायुक्त के पास इस मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि वन विभाग के अंतर्गत मनरेगा के तहत हुए कार्यों में भारी वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। प्रारंभिक जांच के बाद जब मामला गंभीर पाया गया, तो इसकी जिम्मेदारी विजिलेंस को सौंपी गई। अब विजिलेंस यह पता लगाने में जुटी है कि किस स्तर पर नियमों की अनदेखी कर सरकारी बजट का बंदरबांट किया गया।

जांच के घेरे में कई अधिकारी और कर्मचारी
इस घोटाले की आंच वन विभाग के कई वर्तमान और पूर्व अधिकारियों तक पहुंच रही है। जांच के दायरे में छह तत्कालीन वनखंड अधिकारी और 16 वनरक्षक शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिन अधिकारियों के कार्यकाल में ये कार्य हुए थे, उनमें से कई अब पदोन्नत होकर वन परिक्षेत्र अधिकारी बन चुके हैं। वहीं, 16 वनरक्षकों में से चार अब वन खंड अधिकारी के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। विजिलेंस ने स्पष्ट किया है कि केवल सेवारत ही नहीं, बल्कि उन सेवानिवृत्त अधिकारियों के कार्यकाल के रिकॉर्ड की भी जांच होगी, जो उस दौरान इन पदों पर तैनात थे।

घोटाले की जांच से जुड़े मुख्य बिंदु
• कुल 41 विकास कार्यों की जांच डीआरडीए द्वारा की गई थी।
• जांच में 32 कार्यों में गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताएं पाई गईं।
• कई स्थलों पर निर्माण सामग्री का रिकॉर्ड में दर्ज मात्रा से कम पाया जाना।
• सरकारी रिकॉर्ड और धरातल पर हुए कार्यों के बीच बड़ा अंतर मिलना।

तकनीकी विशेषज्ञों की ली जाएगी मदद
विजिलेंस केवल कागजी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि धरातल पर हुए निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन भी किया जाएगा। इसके लिए विजिलेंस विभाग तकनीकी विशेषज्ञों और इंजीनियरों की एक टीम का सहयोग लेगा। यह टीम मौके पर जाकर कार्यों की गुणवत्ता और इस्तेमाल की गई सामग्री का मूल्यांकन करेगी। कई मामलों में यह भी देखा गया है कि कागजों पर तो सामग्री की खरीद दिखाई गई है, लेकिन मौके पर उसका कोई अस्तित्व नहीं मिला।

प्रशासनिक मिलीभगत की भी होगी पड़ताल
वित्तीय गबन के साथ-साथ विजिलेंस इस बात की भी जांच कर रही है कि इस पूरी प्रक्रिया में प्रशासनिक स्तर पर किन लोगों ने नियमों को ताक पर रखा। यदि जांच के दौरान विभाग के अन्य उच्चाधिकारियों या किसी बाहरी ठेकेदार व व्यक्ति की संलिप्तता पाई जाती है, तो उन्हें भी मामले में आरोपी बनाया जाएगा। विजिलेंस के अधिकारियों का कहना है कि साक्ष्यों को जोड़ने के लिए दस्तावेजी सबूत सबसे महत्वपूर्ण हैं, इसलिए रिकॉर्ड को जल्द से जल्द सुरक्षित करना प्राथमिकता है। इस कार्यवाही से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

 

Pls read:Himachal: हिमाचल के गरीब परिवारों को बड़ी सौगात अब 10 लाख रुपये तक मिलेगा मुफ्त इलाज

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *