शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के कृषि और बागवानी क्षेत्र को वैज्ञानिक और आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से ‘राज्य किसान आयोग’ के गठन का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह कदम प्रदेश की लगभग 70 प्रतिशत आबादी के जीवन में बड़ा बदलाव लाएगा, जो अपनी आजीविका के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती पर निर्भर है। अब तक कृषि से जुड़ी नीतियां अक्सर प्रशासनिक स्तर पर तैयार की जाती थीं, लेकिन इस आयोग के अस्तित्व में आने के बाद धरातल से जुड़े सुझावों और किसानों की वास्तविक समस्याओं को नीति-निर्माण में प्राथमिकता दी जाएगी।
इस आयोग का मुख्य उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के इस दौर में बेमौसमी वर्षा और ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए एक ठोस रणनीति तैयार करना है। इसके साथ ही, पारंपरिक खेती को आधुनिक तकनीक और नवीनतम मशीनीकरण से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता रहेगी। आयोग यह भी सुनिश्चित करेगा कि केवल उत्पादन बढ़ाना ही लक्ष्य न हो, बल्कि किसानों को उनकी मेहनत का उचित और लाभकारी मूल्य भी प्राप्त हो सके।
सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए पशुपालन और डेयरी क्षेत्र पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। सरकार का मानना है कि जब गांव का किसान और पशुपालक आर्थिक रूप से समृद्ध होगा, तभी प्रदेश आत्मनिर्भरता के मार्ग पर अग्रसर होगा। इसी दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए गाय और भैंस के दूध के खरीद मूल्य में 10-10 रुपये प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी की गई है। इस निर्णय से उन हजारों परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिनका जीवन निर्वाह डेयरी फार्मिंग के माध्यम से होता है। इससे न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में खुशहाली आएगी, बल्कि युवाओं का रुझान भी पुनः पशुपालन की ओर बढ़ेगा।
प्रदेश के दुर्गम इलाकों में रहने वाले भेड़ पालकों और चरवाहों के लिए भी बजट में राहत भरे प्रावधान किए गए हैं। लगभग दो करोड़ रुपये के निवेश से ऊन उद्योग का आधुनिकीकरण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले चरवाहों का बीमा कराया जाएगा और सभी पात्र पालकों को डिजिटल कार्ड प्रदान किए जाएंगे, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक बिना किसी बिचौलिये के पारदर्शी तरीके से पहुंच सके।
कृषि क्षेत्र में विविधता लाने के लिए सरकार ने पहली बार अदरक की फसल पर 30 रुपये का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित किया है। साथ ही, हल्दी का खरीद मूल्य भी 90 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलो कर दिया गया है। इन फैसलों से नकदी फसलों को बढ़ावा मिलेगा और उत्पादकों को बिचौलियों के शोषण से मुक्ति मिलेगी। इन प्रयासों से स्पष्ट है कि सरकार ग्रामीण बुनियादी ढांचे और किसान कल्याण को अपनी विकास नीतियों के केंद्र में रख रही है।
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