देहरादून। उत्तराखंड में रसोई गैस (एलपीजी) और ईंधन की कृत्रिम किल्लत पैदा करने वाले जमाखोरों और कालाबाजारी करने वालों के विरुद्ध प्रदेश सरकार ने अपना शिकंजा कस दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने पूरे प्रदेश में एक सघन जांच और प्रवर्तन अभियान छेड़ रखा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी तनाव के बीच राज्य के भीतर गैस और ईंधन की वितरण व्यवस्था सुचारू बनी रहे और कोई भी व्यक्ति स्थिति का अनुचित लाभ न उठा सके। पिछले तीन दिनों के भीतर विभाग ने रिकॉर्ड स्तर पर कार्रवाई करते हुए प्रदेश भर में सैकड़ों स्थानों पर छापेमारी की है, जिससे अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के बीच हड़कंप मच गया है।
तीन दिवसीय अभियान और सघन निरीक्षण
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 10, 11 और 12 मार्च 2026 के बीच विभाग के अधिकारियों ने प्रदेश के कोने-कोने में व्यापक निरीक्षण किया। आयुक्त खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति ने इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए बताया कि इन तीन महत्वपूर्ण दिनों के दौरान कुल 280 निरीक्षण किए गए। विभाग की टीमें न केवल शहरों, बल्कि दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित गैस एजेंसियों और ईंधन केंद्रों पर भी पहुंचीं। इन निरीक्षणों के दौरान 58 विशिष्ट स्थानों पर छापेमारी की गई, जहां अनियमितताओं की प्रबल आशंका थी।
कठोर कानूनी कार्रवाई और एफआईआर
सरकार ने केवल छापेमारी तक ही सीमित न रहकर, नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कदम भी उठाए हैं। अनियमितताओं और अवैध गतिविधियों की गंभीरता को देखते हुए तीन दिनों के भीतर ही कुल 4 प्राथमिकियां (एफआईआर) दर्ज कराई गई हैं। यह कदम उन तत्वों को एक कड़ा संदेश देने के लिए उठाया गया है जो आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला में बाधा डालने का प्रयास कर रहे हैं। विभाग का स्पष्ट मानना है कि उपभोक्ता हितों से खिलवाड़ करने वालों के साथ किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।
बड़ी संख्या में सिलेंडर और रिफिलिंग उपकरण जब्त
अभियान के दौरान प्रवर्तन टीमों ने अवैध भंडारण और गैस के दुरुपयोग के कई बड़े मामलों का खुलासा किया है। इस तीन दिवसीय कार्रवाई के दौरान विभिन्न स्थानों से कुल 74 गैस सिलेंडर जब्त किए गए हैं। ये वे सिलेंडर थे जिन्हें या तो अवैध रूप से जमा करके रखा गया था या जिनका उपयोग व्यावसायिक रूप से नियम विरुद्ध किया जा रहा था। सिलेंडरों के अलावा, विभाग ने अवैध रिफिलिंग के गोरखधंधे पर भी चोट की है। कार्रवाई के दौरान 2 रिफिलिंग किट और 1 वजन मापने वाला कांटा भी बरामद कर जब्त किया गया है। इन उपकरणों का उपयोग घरेलू गैस सिलेंडरों से व्यावसायिक सिलेंडरों में गैस चोरी करने और अवैध रूप से भरने के लिए किया जा रहा था। इसके साथ ही, छोटी-मोटी अनियमितताओं के लिए विभाग ने 4600 रुपये का अर्थदंड भी वसूला है।
शासन की शून्य सहनशीलता की नीति
आयुक्त खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उत्तराखंड सरकार उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर और समयबद्ध तरीके से गैस एवं ईंधन उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह से संकल्पित है। उन्होंने चेतावनी दी कि कालाबाजारी, जमाखोरी या गैस की अवैध रिफिलिंग जैसी गतिविधियों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त (जीरो टॉलरेंस) नहीं किया जाएगा। आयुक्त के अनुसार, ऐसे अपराध समाज के प्रति गंभीर अन्याय हैं और दोषियों के विरुद्ध भविष्य में भी इसी प्रकार की कठोर वैधानिक कार्रवाई जारी रहेगी।
जनता से सहयोग की अपील
विभाग ने इस लड़ाई में आम जनता को भी भागीदार बनाने का आह्वान किया है। आयुक्त ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और यदि उनके आसपास कहीं भी एलपीजी या ईंधन की कालाबाजारी, अवैध रिफिलिंग या जमाखोरी की कोई जानकारी मिलती है, तो वे तुरंत इसकी सूचना संबंधित जिला प्रशासन या खाद्य विभाग के अधिकारियों को दें। जनता से प्राप्त सूचनाओं पर विभाग तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
आयुक्त ने अंत में भरोसा दिलाया कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए विभाग की सतर्कता कम नहीं होगी और आने वाले दिनों में यह सघन जांच अभियान और भी तेजी से जारी रखा जाएगा। शासन की इस सक्रियता से यह उम्मीद जगी है कि प्रदेश में ईंधन की आपूर्ति व्यवस्था जल्द ही पूरी तरह सामान्य हो जाएगी और कालाबाजारी करने वाले तत्वों पर स्थायी रूप से लगाम लगेगी।
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