लखनऊ। राजधानी लखनऊ में निवेश के नाम पर मासूम लोगों को ठगने और उनके साथ लूटपाट करने वाले एक शातिर गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि इस गिरोह का सक्रिय सदस्य उत्तर प्रदेश पुलिस का ही एक सिपाही है। चिनहट पुलिस ने अपने ही थाने में तैनात सिपाही पूर्ण सिंह को उसके तीन अन्य साथियों के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इन आरोपितों के पास से सवा लाख रुपये की नकदी और वारदात में इस्तेमाल की गई दो कारें भी बरामद की हैं।
पूर्वी जोन की डीसीपी दीक्षा शर्मा ने मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस को इस गिरोह के बारे में तब पता चला जब पीड़ितों ने शिकायत दर्ज कराई। घटना की जानकारी फैलने और मुकदमा दर्ज होने के बाद गिरोह के सदस्य घबरा गए थे और वे पीड़ितों की रकम वापस कर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश में जुटे थे। इसी दौरान पुलिस ने घेराबंदी कर चारों आरोपितों को धर दबोचा। पकड़े गए आरोपितों की पहचान जावेद हुसैन, आसिफ, प्रवेश त्रिपाठी और आरक्षी पूर्ण सिंह के रूप में हुई है।
इस पूरे मामले की शुरुआत तेलीबाग निवासी प्रभाकर सिंह की शिकायत से हुई। प्रभाकर ने 11 जून को चिनहट थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि उनके भाई और उनके मित्र को एक फर्जी कंपनी में निवेश कर कम समय में पैसा दोगुना करने का लालच दिया गया था। इसके बाद उन्हें बुलाकर डराया-धमकाया गया और उनके साथ लूटपाट की गई। शुरुआती जांच में जयप्रकाश यादव और आनंद दुबे का नाम सामने आया था, जिसके बाद पुलिस की सर्विलांस टीम और चिनहट पुलिस ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने हरदासी खेड़ा नहर पुलिया के पास से इन चारों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह गिरोह एक सुव्यवस्थित सिंडिकेट की तरह काम करता था। ये लोग पहले अमीर निवेशकों को मोटा मुनाफा दिलाने का लालच देकर किसी सुनसान जगह या होटल के पास बुलाते थे। इसके बाद सिपाही पूर्ण सिंह और उसके साथी पुलिस या अन्य सरकारी एजेंसियों का फर्जी डर दिखाकर पीड़ितों को धमकाते थे। इसी डर का फायदा उठाकर वे पीड़ितों से जबरन वसूली और लूटपाट करते थे।
वारदात के दिन यानी 10 जून को पीड़ितों को चिनहट के ग्लोबल इन होटल के पास बुलाया गया था। वहां आरोपितों ने सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल कर पीड़ितों को बैठाया और उनके साथ लूट की घटना को अंजाम दिया। पुलिस जांच में सिपाही पूर्ण सिंह की भूमिका बेहद संदिग्ध पाई गई है। बताया जा रहा है कि गिरोह की योजना तैयार करने और उसे अंजाम देने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। वर्तमान में पुलिस इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक और कितने लोगों को अपना निशाना बनाया है। सिपाही की इस करतूत ने पुलिस विभाग की छवि को भी नुकसान पहुंचाया है, जिसके चलते विभाग अब उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की तैयारी में है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपितों के पास से बरामद वाहनों और नकदी को साक्ष्य के तौर पर पेश किया जाएगा। फिलहाल सभी आरोपितों को जेल भेज दिया गया है।