हरिद्वार। तीर्थनगरी हरिद्वार में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान पैदा हुए विवाद ने तब बड़ा रूप ले लिया जब श्रवण नाथ नगर स्थित एक भवन पर ‘बार’ का साइन बोर्ड लगा दिया गया। इस घटना से आक्रोशित स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर जबरदस्त हंगामा किया। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना था कि यह कृत्य धर्मनगरी की पवित्रता और यहां की स्थापित मर्यादा के खिलाफ है। विवाद को बढ़ता देख पुलिस ने हस्तक्षेप किया और विवादित बोर्ड को हटवाना पड़ा, जिसके बाद ही स्थिति सामान्य हो सकी।
पिछले कुछ दिनों से हरिद्वार के विभिन्न इलाकों में एक फिल्म की शूटिंग का काम चल रहा है। इसी सिलसिले में बुधवार की शाम को श्रवण नाथ नगर के भाटिया भवन में एक दृश्य फिल्माया जाना था। फिल्म की पटकथा की आवश्यकता के अनुसार, प्रोडक्शन टीम को उस भवन को एक बार और कैफे के रूप में दिखाना था। इसके लिए क्रू मेंबर्स ने भवन के बाहरी हिस्से और मुख्य दीवार पर ‘बार एंड कैफे’ का एक बड़ा साइन बोर्ड लगा दिया।
जैसे ही स्थानीय लोगों की नजर इस बोर्ड पर पड़ी, विरोध के स्वर गूंजने लगे। देखते ही देखते करन पंडित, पार्षद हिमांशु गुप्ता, शहर व्यापार मंडल के महामंत्री अमन शर्मा और कशिश भाटिया सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता वहां जमा हो गए। उन्होंने फिल्म निर्माण टीम के इस कदम को सीधे तौर पर तीर्थ स्थल का अपमान बताया। प्रदर्शनकारियों ने तर्क दिया कि हरिद्वार एक ऐसा पावन स्थल है जहां कानूनी रूप से भी मांस और मदिरा का सेवन व बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसे में फिल्म के दृश्य के लिए भी किसी भवन को बार के रूप में दर्शाना और उसका बोर्ड लगाना यहां की धार्मिक मान्यताओं के साथ खिलवाड़ है।
विवाद में शामिल तीर्थ पुरोहित उज्ज्वल पंडित ने भी अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि हरिद्वार की पहचान पूरी दुनिया में एक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में है। फिल्म शूटिंग के नाम पर इस तरह के दृश्यों का निर्माण, जो यहां की संस्कृति और नियमों के विपरीत हों, बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कार्यकर्ताओं ने मांग की कि फिल्म कंपनी को अपनी शूटिंग के लिए ऐसे प्रतीकों का उपयोग बंद करना चाहिए जो स्थानीय जनता की भावनाओं को आहत करते हों।
हंगामे की सूचना मिलते ही शहर कोतवाली से पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस ने स्थिति का जायजा लिया और प्रदर्शन कर रहे नेताओं व फिल्म यूनिट के सदस्यों के बीच मध्यस्थता की। जनभावनाओं के तीव्र विरोध को देखते हुए पुलिस ने शूटिंग स्टाफ को तुरंत निर्देश दिए कि वे भवन से बार का बोर्ड हटा लें। प्रशासन के कड़े रुख के बाद फिल्म कंपनी ने बोर्ड उतार दिया, तब जाकर प्रदर्शनकारी शांत हुए और वहां से हटे।
शहर कोतवाल कुंदन सिंह राणा ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि विवाद की स्थिति उत्पन्न होते ही त्वरित कार्रवाई की गई और साइन बोर्ड को हटा दिया गया। उन्होंने फिल्म निर्माण कंपनी को हिदायत दी है कि भविष्य में शूटिंग के दौरान किसी भी भवन पर इस तरह के आपत्तिजनक बोर्ड न लगाए जाएं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि फिल्म निर्माण के दौरान स्थानीय कानूनों और धार्मिक संवेदनशीलता का पूरा ध्यान रखा जाना अनिवार्य है ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे। इस घटना के बाद इलाके में काफी देर तक चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।