बिश्केक। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट कर दिया है कि तेहरान अमेरिकी धमकियों और दबाव के आगे किसी भी सूरत में नहीं झुकेगा। किर्गिस्तान के चोलपोन-अता में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान अराघची ने कड़े शब्दों में कहा कि ईरान किसी भी प्रकार की जबरदस्ती या सैन्य शक्ति के इस्तेमाल के सामने घुटने नहीं टेकेगा। उन्होंने वाशिंगटन को संदेश दिया कि ईरान ने हमेशा साबित किया है कि वह धौंस की भाषा को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा और अपनी सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा।
संचार नहीं अमेरिकी नीति है मुख्य बाधा
प्रेस टीवी के अनुसार, अब्बास अराघची ने राजनयिक चर्चाओं के दौरान कहा कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच मुख्य समस्या संचार माध्यमों की कमी नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच सबसे बड़ी बाधा अमेरिका की लगातार धमकाने और जबरदस्ती करने की नीति है। अराघची ने स्पष्ट किया कि जब तक ईरानी लोगों की वैध मांगें और उद्देश्य पूरे नहीं होते, तब तक ईरान अपने सिद्धांतों पर अडिग रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के हितों की रक्षा करना और अपने नागरिकों की सुरक्षा करना उनके देश की मूल नीतियों का हिस्सा है।
पश्चिमी एजेंडे के खिलाफ एकजुट हो एससीओ देश
शिखर सम्मेलन के दौरान अराघची ने किर्गिस्तान, रूस, पाकिस्तान, चीन और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। उन्होंने विशेष रूप से चीनी विदेश मंत्री वांग यी और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ विस्तृत चर्चा की और बीजिंग व मॉस्को के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखने की पुष्टि की। अराघची ने एससीओ को एक प्रगतिशील संगठन बताते हुए सदस्य देशों से आह्वान किया कि वे अमेरिका और पश्चिमी देशों के उस एकतरफा एजेंडे का विरोध करें जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर हावी होना चाहते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के समर्थन और राज्य की संप्रभुता की वकालत करने की जरूरत बताई।
युद्ध की 13वीं रात और बढ़ता सैन्य तनाव
अराघची का यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में सैन्य संघर्ष तेज हो गया है। अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने लगातार 13वीं रात को ईरान में हवाई हमले किए। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में ईरान की सैन्य संपत्तियों को निशाना बनाया गया है। फार्स समाचार एजेंसी के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ओमान सागर में एक एलपीजी टैंकर पर दो मिसाइलें दागीं, क्योंकि उन्हें संदेह था कि जहाज ईरानी गैस का परिवहन कर रहा था। इन हमलों में ईरान के बंदर अब्बास क्षेत्र में कम से कम दो लोगों के घायल होने की सूचना मिली है।
ईरान की जवाबी कार्रवाई और नरक का टिकट
ईरानी सेना ने अमेरिकी हमलों का जवाब ‘ऑपरेशन लाइटनिंग’ के तहत दिया है। ईरान ने शुक्रवार को कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमलों की एक नई लहर शुरू की। बहरीन में अमेरिकी नौसेना के अल-जुफेयर सैन्य अड्डे पर तीन बड़े विस्फोट होने की खबर है, जबकि कुवैत में अली अल-सलेम एयर बेस को भी निशाना बनाया गया। खताम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के कमांडर मेजर जनरल अब्दुल्लाही ने अमेरिका को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि अब से प्रत्येक शहीद ईरानी नागरिक के बदले एक अमेरिकी सैनिक को निशाना बनाया जाएगा। उन्होंने बेहद सख्त लहजे में कहा कि ईरान ने अमेरिकी सैनिकों के लिए ‘नरक के सीधे टिकट’ तैयार कर लिए हैं। इस सैन्य तनातनी ने पूरे क्षेत्र को युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।
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