लखनऊ। उत्तर प्रदेश में रसोई गैस यानी एलपीजी सिलिंडर की किल्लत लगातार गहराती जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से आपूर्ति व्यवस्था को सुधारने के लिए किए जा रहे तमाम दावों और सख्त निर्देशों के बावजूद धरातल पर स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध का सीधा असर अब प्रदेश की रसोई और छोटे व्यापारियों के रोजगार पर पड़ने लगा है। विशेष रूप से कमर्शियल सिलिंडर की आपूर्ति ठप होने के कारण चाय की दुकानों, फास्ट फूड के ठेलों और टिफिन सेवाओं पर ताले लटकने लगे हैं। घरेलू उपभोक्ता भी लंबी वेटिंग लिस्ट के कारण परेशान हैं और अब वे गैस के वैकल्पिक साधनों की ओर भाग रहे हैं, जिसका फायदा उठाकर व्यापारियों ने लूट मचा रखी है।
रोजगार पर मंडराया संकट और छोटे व्यापारियों की बेबसी
खाड़ी देशों में जारी संघर्ष के कारण एलपीजी के कमर्शियल सिलिंडरों की किल्लत इतनी बढ़ गई है कि बाजार में छोटे व्यवसायों का दम घुटने लगा है। फास्ट फूड, चाय और पूड़ी-सब्जी के ठेले चलाने वाले लोग अब अपना काम बंद करने को मजबूर हैं। राजाजीपुरम क्षेत्र के होटल संचालक अंकित अरोड़ा का कहना है कि कमर्शियल सिलिंडर न मिलने के कारण पिछले तीन दिनों से उनका व्यापार पूरी तरह ठप पड़ा है। यही हाल मंडियाव में टिफिन सेवा चलाने वाले हर्षित गुप्ता का है। हर्षित के अनुसार, सिलिंडर की अनुपलब्धता के कारण वे अब अपने ग्राहकों को टिफिन सेवा देने में असमर्थ हैं। ऐसे सैकड़ों लोग हैं जिनका जीवन यापन इन छोटे व्यवसायों पर निर्भर है और गैस की कमी ने उनकी रोजी-रोटी छीन ली है। कमर्शियल सिलिंडर न मिलने से भूतनाथ और राजाजीपुरम जैसे व्यस्त इलाकों में कई रेस्टोरेंट बंद हो चुके हैं।
मुख्यमंत्री के कड़े तेवर और प्रशासनिक निर्देश
गैस आपूर्ति की इस विकट स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन स्तर पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने तेल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें रसोई गैस की आपूर्ति और वितरण प्रणाली की बारीकी से जांच की गई। योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया कि प्रदेश में डीजल और पेट्रोल की कोई कमी नहीं है, इसलिए जनता को रसोई गैस की कमी से जुड़ी अफवाहों से बचना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कालाबाजारी और जमाखोरी करने वाले तत्वों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने प्रशासन से कहा है कि किसी भी स्थिति में आम जनता के बीच घबराहट नहीं फैलनी चाहिए और सिलिंडरों का वितरण समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने खाद्य एवं रसद विभाग को तत्काल कंट्रोल रूम स्थापित करने और जनता को पल-पल की जानकारी से अपडेट रखने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, सुरक्षा की दृष्टि से एलपीजी गैस वितरण केंद्रों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है ताकि किसी भी प्रकार की अराजकता न हो। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार की ओर से प्रदेश को 80 लाख लीटर केरोसिन आवंटित किया गया है, जो वैकल्पिक व्यवस्था में सहायक होगा।
आपदा में अवसर तलाश रहे व्यापारी और बढ़ती महंगाई
एक ओर जहां जनता गैस के लिए त्राहि-त्राहि कर रही है, वहीं दूसरी ओर व्यापारियों के लिए यह आपदा अवसर बन गई है। एलपीजी का विकल्प तलाश रहे लोग अब इंडक्शन कुक टॉप, कोयला और लकड़ी की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे इनकी कीमतों में भारी उछाल आया है। इलेक्ट्रॉनिक बाजार में इंडक्शन चूल्हों की मांग पिछले तीन दिनों में 50 प्रतिशत तक बढ़ गई है। बाजार में अब लोग स्टैंड वाले इंडक्शन की मांग कर रहे हैं, जिन पर रोटी सेंकने वाली जाली लगी होती है। विक्रेता आरके महेश्वरी के अनुसार, इस खास प्रकार के इंडक्शन की कीमत 3300 रुपये तक पहुंच गई है, जबकि अन्य ब्रांडेड इंडक्शन भी 2200 से 3000 रुपये के बीच बिक रहे हैं।
केवल इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ही नहीं, बल्कि पारंपरिक ईंधन की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। हफ्ते भर पहले 25 रुपये प्रति किलो बिकने वाला इमली का कोयला अब 40 से 50 रुपये किलो तक बिक रहा है। वहीं, 20 रुपये किलो मिलने वाली लकड़ी की कीमत बढ़कर 30 रुपये प्रति किलो हो गई है। रेस्टोरेंट संचालकों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए भट्ठी बेचने वालों ने भी दाम बढ़ा दिए हैं। जो भट्ठी पहले 500 से 800 रुपये में मिल जाती थी, वह अब दो से तीन हजार रुपये में बिक रही है। ऐशबाग, चिनहट और सीतापुर रोड पर रेस्टोरेंट संचालकों को एडवांस पैसे जमा करके भट्ठी की बुकिंग करते देखा जा रहा है।
भविष्य की अनिश्चितता और जनमानस में चिंता
योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी है कि किसी भी स्तर पर कृत्रिम किल्लत उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। यदि कोई वितरक एजेंसी या निजी व्यक्ति जमाखोरी में संलिप्त पाया जाता है, तो उस पर कठोर कार्रवाई की जाए। हालांकि, सरकार की इन चेतावनियों का असर बाजार पर फिलहाल कम ही दिखाई दे रहा है। कमर्शियल सिलिंडर की भारी कमी ने न केवल होटलों को प्रभावित किया है, बल्कि उन हजारों घरों को भी संकट में डाल दिया है जो पूरी तरह गैस पर निर्भर थे। लंबी वेटिंग लिस्ट और गैस गोदामों पर उमड़ती भीड़ यह बताने के लिए काफी है कि संकट गहरा है।
अराजकता को रोकने के लिए पुलिस की तैनाती तो कर दी गई है, लेकिन आपूर्ति की चेन कब तक सामान्य होगी, इस पर अब भी अनिश्चितता बनी हुई है। जनता को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप और तेल कंपनियों पर बनाए गए दबाव के बाद वितरण व्यवस्था में सुधार होगा और कालाबाजारी करने वालों पर लगाम लगेगी। फिलहाल, उत्तर प्रदेश का आम नागरिक रसोई गैस की इस भारी किल्लत के बीच महंगे विकल्पों और व्यापारियों की मनमानी से जूझने को मजबूर है।
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