देहरादून, 27 अप्रैल। उत्तराखंड में बढ़ती गर्मी और लू (हीट वेव) के कारण बिजली की
मांग में हुए अभूतपूर्व उछाल को देखते हुए शासन ने कमर कस ली है। मुख्य सचिव
आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सोमवार को राज्य में विद्युत आपूर्ति की
वर्तमान स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव ने
अधिकारियों को निर्देश दिए कि मई और जून के महीनों में उपभोक्ताओं को निर्बाध
बिजली उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त बिजली प्रबंधन के ठोस कदम उठाए जाएं।
उन्होंने सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
बैठक के दौरान यूपीसीएल ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि देशभर में चल रही
भीषण गर्मी के कारण बिजली की मांग ऐतिहासिक स्तर पर पहुँच गई है। उत्तराखंड
में भी 25 अप्रैल को बिजली की अधिकतम मांग 2647 मेगावाट दर्ज की गई। नदियों के
जल स्तर में कमी आने के कारण जल विद्युत उत्पादन में गिरावट आई है, वहीं
अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते गैस की सीमित उपलब्धता ने
गैस आधारित संयंत्रों के उत्पादन को भी प्रभावित किया है। इसके साथ ही
उपभोक्ताओं द्वारा इंडक्शन कुकर, एसी और कूलर जैसे उपकरणों के बढ़ते
उपयोग से सिस्टम पर 50 से 100 मेगावाट का अतिरिक्त भार पड़ा है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। 24 अप्रैल को भारत की अधिकतम
बिजली मांग 252 गीगावाट दर्ज की गई। देश के 40 से अधिक शहरों में तापमान 40
डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया है, जिससे ऊर्जा एक्सचेंज में 10 रुपये
प्रति यूनिट की अधिकतम दर पर भी पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इन कठिन
परिस्थितियों के बावजूद यूपीसीएल प्रबंधन ने उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति
सुनिश्चित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य सरकार के प्रयासों के बाद केंद्र सरकार ने केंद्रीय
पूल से उत्तराखंड को 150 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया
है। इसके अतिरिक्त, हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड के अध्यक्ष
प्रभोध सक्सेना ने भी यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक से मुलाकात की है। दोनों राज्यों
के बीच जून माह के लिए ‘बैंकिंग व्यवस्था’ के माध्यम से बिजली के आदान-प्रदान पर
सकारात्मक चर्चा हुई है, जिससे आगामी दिनों में आपूर्ति व्यवस्था और अधिक
सुदृढ़ होने की उम्मीद है।
प्रशासन ने आम जनता से भी जिम्मेदारीपूर्वक बिजली का उपयोग करने की अपील की है।
विशेष रूप से शाम के समय (पीक आवर्स) में अनावश्यक बिजली उपकरणों का उपयोग
न करने का आग्रह किया गया है। बैठक में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, एन एस
बिष्ट, नवीन मिश्रा और आकाश शर्मा सहित ऊर्जा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी
उपस्थित रहे। यूपीसीएल ने भरोसा दिलाया कि वह रियल-टाइम मॉनिटरिंग और कुशल
लोड प्रबंधन के माध्यम से आपूर्ति को संतुलित रखने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा
है।