जालंधर। पंजाब की राजनीति और व्यापारिक जगत में उस समय हड़कंप मच गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीमों ने मंगलवार सुबह एक साथ कई ठिकानों पर दस्तक दी। यह कार्रवाई पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा और उनसे जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में की गई है। पूरा मामला करीब 100 करोड़ रुपये की जीएसटी धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है, जिसकी जांच की आंच अब पंजाब से होते हुए दिल्ली और उत्तर प्रदेश तक पहुंच गई है।
प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार को यह तलाशी अभियान कुल छह महत्वपूर्ण ठिकानों पर चलाया गया। इनमें पंजाब के जालंधर और लुधियाना के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के बरेली और नोएडा के आवासीय व व्यावसायिक परिसर शामिल हैं। जांच का मुख्य केंद्र संजीव अरोड़ा की कंपनी ‘हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड’ है। ईडी की टीमें इस कंपनी के अलावा उससे जुड़ी अन्य सहयोगी संस्थाओं और संबंधित व्यक्तियों के ठिकानों पर भी वित्तीय रिकॉर्ड खंगाल रही हैं।
जांच एजेंसी का मानना है कि हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड और उसके सहयोगियों ने वित्तीय लेन-देन में भारी हेरफेर की है, जो सीधे तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे में आता है। छापेमारी के दौरान ईडी के अधिकारियों ने भारी मात्रा में दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं। इन डिजिटल डिवाइस और कागजातों का गहराई से विश्लेषण किया जा रहा है ताकि 100 करोड़ रुपये की इस कथित धोखाधड़ी के पीछे के असली नेटवर्क का पता लगाया जा सके। सूत्रों की मानें तो जांच के दौरान कुछ ऐसे अहम सुराग मिले हैं जो इस मामले में और भी कई रसूखदार लोगों की मुश्किल बढ़ा सकते हैं।
इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस छापेमारी को राजनीतिक रंग देते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों के माध्यम से पंजाब के छोटे हिंदू व्यापारियों को जानबूझकर निशाना बना रही है। केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि ईडी पंजाब में व्यापारियों को बेवजह परेशान कर रही है, जिससे उनके कामकाज पर बुरा असर पड़ रहा है।
केजरीवाल ने व्यापारियों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि उन्हें इस तरह की कार्रवाई से घबराने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार पूरी तरह से व्यापारी समुदाय के हितों की रक्षा के लिए उनके साथ खड़ी है और वे सभी एकजुट होकर प्रवर्तन निदेशालय की इन कार्रवाइयों का डटकर मुकाबला करेंगे। इस बयान के बाद राज्य में राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है।
एक तरफ जहां जांच एजेंसी भ्रष्टाचार और कर चोरी के मामलों को उजागर करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ सत्ताधारी दल इसे बदले की राजनीति करार दे रहा है। फिलहाल सभी की नजरें ईडी की अगली कार्रवाई और जब्त किए गए दस्तावेजों से निकलने वाले निष्कर्षों पर टिकी हैं। यह छापेमारी आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकती है।