Delhi: चरखी दादरी की दो बेटियों ने रचा इतिहास एनडीए के जरिए बनीं देश की पहली महिला फाइटर पायलट

चरखी दादरी। हरियाणा के चरखी दादरी जिले की दो होनहार बेटियों, इशिता सांगवान और मीनाक्षी ने इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा दिया है। ये दोनों बेटियां नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) के जरिए देश की पहली महिला फाइटर पायलट बनने का गौरव हासिल करने जा रही हैं। साढे तीन साल के कठिन प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद, आज हैदराबाद में उन्हें वायुसेना में आधिकारिक रूप से कमीशन प्रदान किया जाएगा। इन दोनों बेटियों की पहली पोस्टिंग तेलंगाना के बीदर सेंटर में तय हुई है, जहां से वे अब देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए लड़ाकू विमान उड़ाएंगी।

इस उपलब्धि की सबसे विशेष बात यह है कि एनडीए के मार्ग से लड़ाकू विमान चालक बनने वाली ये देश की पहली दो महिला अधिकारी हैं। छपार गांव की रहने वाली इशिता सांगवान के पिता चरण सिंह सांगवान ने बताया कि उनकी बेटी का यह सफर साल 2021 में आए सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले के बाद शुरू हुआ, जिसमें बेटियों के लिए एनडीए के दरवाजे खोले गए थे। उस समय इशिता अपनी 12वीं की परीक्षाओं की तैयारी कर रही थीं और उनका सपना सिविल सेवा में जाने का था। हालांकि, कोर्ट के निर्णय ने उनके भीतर देश सेवा का नया जज्बा भर दिया और उन्होंने अपना लक्ष्य बदल लिया। लिखित परीक्षा पास करने के बाद अगस्त 2022 में उन्होंने पुणे स्थित एकेडमी में प्रवेश लिया।

वहीं, भागवी गांव की मीनाक्षी का जुड़ाव सेना से पुराना है, क्योंकि उनके पिता रविंद्र स्वयं सेना का हिस्सा रहे हैं। मीनाक्षी उस पहले बैच की 19 बेटियों में शामिल थीं, जिन्हें एनडीए के लिए चुना गया था। उन्होंने पुणे के खड़गवासला में तीन साल का कड़ा प्रशिक्षण प्राप्त किया और फिर वायुसेना विंग में अपनी जगह बनाई। इसके बाद उन्होंने हैदराबाद में छह महीने की फाइटर प्लेन उड़ाने की विशेष ट्रेनिंग भी हाल ही में पूरी की है। मीनाक्षी की इस सफलता से उनके गांव भागवी में जश्न का माहौल है और ग्राम पंचायत की ओर से उनके सम्मान में भव्य समारोह की योजना बनाई गई है। सरपंच प्रमिला कुमारी के अनुसार, पूरे गांव को अपनी इस बहादुर बेटी पर गर्व है।

इशिता सांगवान की आयु अभी करीब साढे बाईस वर्ष है। उनके परिवार में पिता चरण सिंह, मां अनीता देवी और भाई-बहन अपनी बेटी की इस कामयाबी पर फूले नहीं समा रहे हैं। परिवार का मानना है कि बेटियों को यदि बेटों के समान अवसर और प्रोत्साहन मिले, तो वे आसमान की ऊंचाइयों को छू सकती हैं। इशिता जून 2025 में जब अपनी प्रारंभिक ट्रेनिंग पूरी कर गांव लौटी थीं, तब उन्होंने मंदिर जाकर आशीर्वाद लिया था और अब कमीशन प्राप्त करने के बाद वे फिर से अपने ग्रामीणों के बीच लौटेंगी।

सफलता के शिखर पर पहुंची इशिता और मीनाक्षी ने देश की अन्य बेटियों के लिए एक प्रेरणादायी संदेश भी साझा किया है। उनका कहना है कि जीवन में कुछ भी असंभव नहीं है। बेटियों को केवल एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित करने और उसे पाने के लिए अटूट मेहनत करने की आवश्यकता है। एक बार जब लक्ष्य प्राप्त हो जाता है, तो वह खुशी और गौरव जीवनभर साथ रहता है। चरखी दादरी की इन दोनों बेटियों ने यह साबित कर दिया है कि संकल्प और कड़े परिश्रम के बल पर किसी भी बाधा को पार कर इतिहास रचा जा सकता है। अब ये दोनों फाइटर पायलट आसमान में गरजते हुए लड़ाकू विमानों के साथ भारत की शक्ति का प्रदर्शन करेंगी।

 

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