US: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति का दावा

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले तीन महीनों से जारी भीषण तनाव के बाद अब शांति की बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक दावा करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच शांति समझौते के प्रारंभिक मसौदे (एमओयू) पर सहमति बन गई है और युद्ध अब समाप्त हो गया है। हालांकि, ईरान ने इस दावे पर सावधानी बरतते हुए कहा है कि समझौते के बड़े हिस्से पर बातचीत हुई है, लेकिन अभी किसी अंतिम निर्णय पर पहुंचना बाकी है।

राजनयिक सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच रविवार को जिनेवा में इस महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर होने की प्रबल संभावना है। इस बैठक में अमेरिका का प्रतिनिधित्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर सकते हैं, जबकि ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गलीबाफ के शामिल होने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि शनिवार तक समझौते की भाषा और शर्तों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।

शांति की इस सुगबुगाहट का वैश्विक बाजार पर तत्काल और सकारात्मक असर देखा गया। खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम होने की खबरों से कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई हैं। अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में तेजी के बीच भारत में भी बीएसई सेंसेक्स लगभग 1700 अंक की बढ़त के साथ बंद हुआ। इसके साथ ही सोने की कीमतों में तीन प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई और भारतीय रुपये में मजबूती आई है।

समझौते के संभावित मसौदे के अनुसार, अमेरिका ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंध हटा सकता है और विदेशों में जमे ईरान के अरबों डॉलर के फंड को जारी किया जा सकता है। इसके बदले में ईरान को लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाई रोकनी होगी। साथ ही, ईरान ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को सभी देशों के व्यापार के लिए खुला रखने की अमेरिकी मांग पर सहमति जताई है। हालांकि, अमेरिका ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी प्रकार की आर्थिक राहत ईरान के प्रदर्शन और उसकी प्रतिबद्धताओं पर निर्भर करेगी। जेडी वेंस ने सोशल मीडिया पर जोर देकर कहा कि ईरान को केवल हस्ताक्षर करने के लिए पैसे नहीं मिलेंगे, बल्कि उसे अपना परमाणु कार्यक्रम समाप्त करना होगा और उच्च संवर्धित यूरेनियम को नष्ट करना होगा।

इस घटनाक्रम पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इजरायल के हितों की रक्षा करेंगे और ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इजरायल इस समझौते में प्रत्यक्ष पक्ष नहीं है। वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी समझौते की पुष्टि की है और कहा है कि पाकिस्तान इस शांति प्रक्रिया के अगले चरणों में सक्रिय सहयोग कर रहा है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि वे अपनी मुख्य चिंताओं यानी ‘रेड लाइंस’ से कोई समझौता नहीं करेंगे। फिलहाल दुनिया भर की नजरें रविवार को जिनेवा में होने वाली संभावित बैठक पर टिकी हैं। यदि यह समझौता सफल होता है, तो न केवल खाड़ी क्षेत्र में शांति स्थापित होगी, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। डोनल्ड ट्रंप ने विश्वास जताया है कि ईरान अब कभी परमाणु बम नहीं बना पाएगा और यह समझौता क्षेत्र की सुरक्षा के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

Pls read:US: ईरान के खिलाफ ट्रंप का घातक प्लान पावर ग्रिड और पुलों को मटियामेट करने की तैयारी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *