नई दिल्ली। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से जारी सीमा विवाद अब एक खुले और भीषण युद्ध में तब्दील हो चुका है। भले ही सैन्य दृष्टि और आधुनिक हथियारों के मामले में पाकिस्तान का पलड़ा काफी भारी नजर आता हो, लेकिन सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा चला, तो अफगान तालिबान पाकिस्तान को बहुत गहरा घाव दे सकते हैं। तालिबान की युद्ध रणनीति और उनके पास मौजूद संसाधनों का विश्लेषण यह संकेत देता है कि यह जंग पाकिस्तान के लिए उतनी आसान नहीं होगी जितनी वह समझ रहा है।
आंकड़ों के आधार पर देखें तो पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सैन्य क्षमता में जमीन-आसमान का अंतर है। ग्लोबल फायरपावर की ताजा रैंकिंग के अनुसार, पाकिस्तान दुनिया की 14वीं सबसे बड़ी सैन्य शक्ति है। पाकिस्तान के पास करीब 6.6 लाख सक्रिय सैनिक हैं, जिनमें 5.6 लाख थल सेना, 70 हजार वायु सेना और 30 हजार नौसेना के कर्मी शामिल हैं। वहीं, अफगानिस्तान इस सूची में 121वें स्थान पर है और उसकी सेना में केवल 1.72 लाख सक्रिय लड़ाके हैं, जिसे वह बढ़ाकर दो लाख करने की कोशिश कर रहा है।
इतने बड़े अंतर के बावजूद अफगानिस्तान की असली ताकत उसके पास मौजूद अमेरिकी और सोवियत युग के हथियार हैं। जब अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान छोड़ा, तो वहां अरबों डॉलर के सैन्य उपकरण, बख्तरबंद गाड़ियां, तोपें और आधुनिक संचार उपकरण छोड़ दिए थे। अब तालिबान सरकार इन्हीं हथियारों का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ कर रही है। उनके पास सोवियत काल के मुख्य युद्धक टैंक और स्वायत्त वाहन भी मौजूद हैं, जो मैदानी जंग में काफी घातक साबित हो सकते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अफगान लड़ाके गुरिल्ला युद्ध यानी छापामार जंग के बेताज बादशाह माने जाते हैं। उन्होंने दशकों तक अमेरिका और सोवियत संघ जैसी दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्तियों को अपने ही मैदान पर धूल चटाई है। अफगानिस्तान की कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, पहाड़ और गहरी घाटियां तालिबान को वह सुरक्षा प्रदान करती हैं, जहाँ वे आसानी से छिपकर दुश्मन पर घात लगा सकते हैं। यदि पाकिस्तानी सेना अफगानिस्तान के भीतर घुसकर बड़ी कार्रवाई करती है, तो उसे उसी तरह के प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा जैसा पूर्व में सुपरपावर्स को करना पड़ा था।
हाल के समय में तालिबान ने अपनी रणनीति में ड्रोन तकनीक को भी शामिल किया है। ये छोटे और सस्ते ड्रोन युद्ध के मैदान में पासा पलटने की क्षमता रखते हैं। हालांकि तालिबान की वायु सेना के बारे में पुख्ता जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन उनके पास मौजूद ड्रोन और मिसाइलें पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में तबाही मचाने के लिए पर्याप्त हैं। निष्कर्ष यह है कि एक छोटी सैन्य कार्रवाई में तो पाकिस्तान हावी रह सकता है, लेकिन लंबी जंग उसे आर्थिक और सैन्य रूप से पूरी तरह तोड़ सकती है। फिलहाल, दोनों ओर से जारी हमलों ने पूरे दक्षिण एशिया में असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है।
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