नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आगामी 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में सबसे चौंकाने वाला और ऐतिहासिक नाम वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी का है। टीएमसी ने गुरुस्वामी के साथ-साथ पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री बाबुल सुप्रियो, बंगाल के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार और जानी-मानी अभिनेत्री कोएल मल्लिक को अपना प्रत्याशी बनाया है। यदि मेनका गुरुस्वामी इस चुनाव में जीत दर्ज करती हैं, तो वे भारतीय संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में पहुंचने वाली देश की पहली एलजीबीटीक्यू (LGBTQ) सदस्य बनकर नया इतिहास रचेंगी।
मेनका गुरुस्वामी वर्तमान में उच्चतम न्यायालय की एक वरिष्ठ और प्रतिष्ठित वकील हैं। उन्हें विशेष रूप से 2018 के उस ऐतिहासिक संवैधानिक मामले के लिए जाना जाता है, जिसमें उन्होंने भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के खिलाफ प्रभावी कानूनी बहस की थी। उनकी दलीलों के परिणामस्वरूप ही सुप्रीम कोर्ट ने भारत में समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। मेनका गुरुस्वामी ने अपने कानूनी करियर की शुरुआत 1997 में भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल अशोक देसाई के मार्गदर्शन में की थी, जिन्हें वे अपना गुरु और मेंटर मानती हैं। उनके कार्यों और उपलब्धियों के कारण ही किरण मनराल की प्रसिद्ध पुस्तक ‘राइजिंग: 30 वीमेन हू चेंज्ड इंडिया’ में उन्हें स्थान दिया गया है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी मेनका गुरुस्वामी का रिकॉर्ड अत्यंत प्रभावशाली रहा है। उन्होंने 2001 में विश्व प्रसिद्ध ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से सिविल लॉ में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और इसके बाद हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से कानून में मास्टर्स (LLM) की पढ़ाई पूरी की। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के रोड्स हाउस स्थित मिलनर हॉल में उनका पोर्ट्रेट (चित्र) लगाया गया है। वे यह सम्मान पाने वाली पहली भारतीय और दुनिया की केवल दूसरी महिला हैं। न्यूयॉर्क की मशहूर लॉ फर्म ‘डेविस पोल्क एंड वार्डवेल’ में काम करने के बाद वे भारत लौट आईं और नई दिल्ली को अपना कार्यक्षेत्र बनाया।
मेनका गुरुस्वामी को अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं ने भी समय-समय पर सम्मानित किया है। उन्हें ‘फॉरेन पॉलिसी’ मैगजीन की 2019 की 100 सबसे प्रभावशाली वैश्विक विचारकों की सूची में शामिल किया गया था। इसी साल वे ‘टाइम’ मैगजीन की 100 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में भी जगह बनाने में सफल रही थीं।
राजनीतिक गलियारों में टीएमसी के साथ उनके जुड़ाव की चर्चा हाल ही में तब तेज हुई जब उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा आई-पैक (I-PAC) के कार्यालयों में की गई छापेमारी को अदालत में चुनौती दी थी। इस मामले में उन्होंने टीएमसी का मजबूती से पक्ष रखा था। अब पार्टी ने उन्हें सीधे सदन में भेजने का फैसला किया है, जिसे विविधता और समावेशी राजनीति की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। उनकी उम्मीदवारी ने राज्यसभा चुनाव की सरगर्मी को और बढ़ा दिया है।
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