Delhi: कूनो नेशनल पार्क में बोत्सवाना से पहुंचे नौ नए मेहमान अब मादा चीतों की संख्या हुई ज्यादा

नई दिल्ली। शनिवार की सुबह भारत के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई। बोत्सवाना से 12 घंटे की लंबी हवाई यात्रा तय कर नौ नए चीते भारत पहुँचे। इन चीतों को विशेष हेलीकॉप्टर के जरिए मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क लाया गया और सीधे क्वारंटीन बाड़ों में सुरक्षित शिफ्ट कर दिया गया। इस नई खेप के आगमन के साथ ही देश में चीतों की कुल आबादी अब 39 से बढ़कर 48 के आंकड़े तक पहुँच गई है।

बोत्सवाना से आए इन मेहमानों में छह मादा और तीन नर चीते शामिल हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, यह खेप कूनो के लिए एक बड़ी ताकत साबित होगी क्योंकि अब तक पार्क में नर चीतों की संख्या अधिक थी। इस नए संतुलन से पार्क के भीतर पारिस्थितिक और प्रजनन संबंधी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव स्वयं इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने कूनो पहुँचे। उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से दो चीतों को क्रेट का हैंडल घुमाकर क्वारंटीन बाड़े में मुक्त किया, जबकि अन्य चीतों को वन विभाग की विशेष टीम ने निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत उनके नए आशियाने में शिफ्ट किया।

कूनो में अब 12 महीने से अधिक उम्र के यानी वयस्क चीतों की संख्या का गणित दिलचस्प हो गया है। यहाँ पहली बार मादाओं की संख्या नरों से अधिक हो गई है। पहले पार्क में 26 वयस्क चीते मौजूद थे, जिनमें 14 नर और 12 मादा शामिल थे। अब नौ नए चीतों के जुड़ने के बाद वयस्कों की कुल संख्या 35 हो गई है, जिसमें 18 मादा और 17 नर चीते हैं। विशेषज्ञ इसे एक सकारात्मक संकेत मान रहे हैं क्योंकि मादाओं की अधिकता से चीतों के बीच होने वाले क्षेत्रीय टकराव में कमी आएगी और भविष्य में शावकों के जन्म की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

फिलहाल इन सभी नौ चीतों को एक महीने तक विशेष क्वारंटीन बाड़ों में कड़ी निगरानी में रखा जाएगा। इस अवधि के दौरान पशु चिकित्सकों और विशेषज्ञों की टीम उनके स्वास्थ्य, खान-पान, व्यवहार और भारतीय वातावरण के प्रति उनकी अनुकूलन क्षमता का बारीकी से अध्ययन करेगी। क्वारंटीन समय पूरा होने के बाद ‘चीता स्टीयरिंग समिति’ प्रत्येक चीते की स्थिति की समीक्षा करेगी। इसके बाद ही यह तय किया जाएगा कि किन चीतों को खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से घूमने के लिए छोड़ा जाए और किन्हें अधिक निगरानी में रखने की आवश्यकता है। वन अधिकारियों का कहना है कि हर चीते की शिकार करने की क्षमता और इंसानी दखल से दूरी जैसे पहलुओं की जांच के बाद ही उन्हें खुले जंगल में जाने की अनुमति मिलेगी।

 

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