शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में दिल्ली और स्थानीय पुलिस के बीच हुए हालिया विवाद को लेकर अब राज्य सरकार ने अपना पक्ष पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने एक बयान जारी कर शिमला पुलिस के कामकाज की सराहना की है। उन्होंने कहा कि शिमला पुलिस ने इस पूरे संवेदनशील मामले में जिम्मेदारी और तत्परता के साथ काम किया है। हिमाचल सरकार ने इस मुद्दे पर एक मजबूत स्टैंड लिया है और कानून के शासन को सर्वोपरि बताया है।
नरेश चौहान ने दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि कार्रवाई के दौरान निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब भी किसी दूसरे राज्य की पुलिस हिमाचल प्रदेश में किसी अपराधी को पकड़ने या जांच के लिए आती है, तो उसे स्थानीय पुलिस को सूचित करना अनिवार्य होता है। नियमों के मुताबिक, बाहरी राज्य की पुलिस को संबंधित प्राथमिकी (एफआइआर) के आधार पर स्थानीय मजिस्ट्रेट से वारंट लेना चाहिए और स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय बिठाकर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में दिल्ली पुलिस ने इनमें से किसी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया, जो पूरी तरह से अनुचित है।
हिमाचल प्रदेश को एक प्रमुख पर्यटन राज्य बताते हुए नरेश चौहान ने कहा कि यहां सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण है। कई बार अन्य राज्यों के अपराधी यहां शरण लेने की कोशिश करते हैं, लेकिन ऐसे मामलों में भी दूसरे राज्यों की पुलिस को नियमानुसार स्थानीय पुलिस को सूचना देकर ही कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने इसे हिमाचल के नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा मामला बताया और कहा कि बिना पूर्व जानकारी के किसी भी बाहरी पुलिस को इस तरह की कार्रवाई की अनुमति नहीं दी जा सकती।
सरकार की मंशा पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए मीडिया सलाहकार ने दोहराया कि हिमाचल सरकार की किसी भी अपराधी को बचाने या संरक्षण देने की रत्ती भर भी मंशा नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में हर किसी को कानून का पालन करना होगा और जो भी कानून का उल्लंघन करेगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने शिमला पुलिस के अधिकारियों की इस बात के लिए तारीफ की कि उन्होंने बाहरी राज्य की पुलिस के मनमाने रवैये के खिलाफ अपनी ड्यूटी को मुस्तैदी से निभाया।
इस दौरान नरेश चौहान ने विपक्षी दल भाजपा और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास अब प्रदेश सरकार के खिलाफ कोई रचनात्मक मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे इस विवाद पर बेवजह की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने जयराम ठाकुर की आलोचना करते हुए कहा कि वे राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) जैसे गंभीर मुद्दों पर हिमाचल की जनता के हितों की रक्षा करने के बजाय केंद्र सरकार का बचाव करते नजर आते हैं। उन्होंने भाजपा की इस बयानबाजी को दुर्भाग्यपूर्ण और प्रदेश के हितों के खिलाफ बताया। सरकार ने साफ कर दिया है कि वह अपने पुलिस बल के साथ खड़ी है और कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं करेगी।