Pakistan: पाकिस्तान सेना के सात सैनिक बंधक बना BLA का अल्टीमेटम – The Hill News

Pakistan: पाकिस्तान सेना के सात सैनिक बंधक बना BLA का अल्टीमेटम

नई दिल्ली। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) नामक अलगाववादी संगठन ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था और सरकार को खुली चुनौती दी है। इस संगठन ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के सात सदस्यों को अपनी हिरासत में ले लिया है। संगठन ने इन बंधक बनाए गए सैनिकों की सुरक्षित रिहाई के बदले पाकिस्तानी सरकार के सामने कैदियों की अदला-बदली की शर्त रखी है। इसके लिए उन्होंने इस्लामाबाद में बैठी सरकार को मात्र सात दिन की समय सीमा प्रदान की है। इस घटना ने एक बार फिर बलूचिस्तान क्षेत्र में जारी गंभीर सुरक्षा संकट को वैश्विक पटल पर ला खड़ा किया है।

BLA द्वारा जारी एक वीडियो संदेश में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित सात दिनों के भीतर सरकार की ओर से वार्ता की कोई सार्थक पहल नहीं की गई, तो उनके कब्जे में मौजूद कैदियों को फांसी पर लटकाया जा सकता है। संगठन का कहना है कि डेडलाइन का समय तेजी से निकल रहा है और अब केवल छह दिन शेष बचे हैं। गौरतलब है कि इस संवेदनशील मामले में अभी तक पाकिस्तानी सरकार या सेना की ओर से कोई आधिकारिक बयान या जानकारी साझा नहीं की गई है, जिससे स्थिति और भी तनावपूर्ण बनी हुई है।

संगठन ने इस पूरी कार्रवाई को अपने विशेष अभियान ‘ऑपरेशन हेरोफ’ के दूसरे चरण का हिस्सा बताया है। BLA के दावों के अनुसार, उनके लड़ाकों ने विभिन्न मोर्चों पर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया, जिसके दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के कुल 17 लोगों को पकड़ा गया था। हालांकि, संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि पकड़े गए लोगों में से 10 व्यक्तियों को कड़ी चेतावनी देने के बाद रिहा कर दिया गया। रिहाई का मुख्य कारण यह बताया गया कि उनकी पहचान ‘एथनिक बलूच’ के रूप में हुई थी और वे स्थानीय पुलिस सेवाओं से जुड़े हुए थे।

वर्तमान में जो सात कैदी BLA की कस्टडी में हैं, उनके बारे में दावा किया गया है कि वे पाकिस्तानी सेना की नियमित इकाइयों के सदस्य हैं। अलगाववादी समूह ने कहा है कि इन बंदियों पर उनके द्वारा संचालित ‘बलूच नेशनल कोर्ट’ के नियमों के तहत कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई है। संगठन का यह अल्टीमेटम पाकिस्तान सरकार के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और सैन्य चुनौती बनकर उभरा है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पाकिस्तान की सरकार अपने सैनिकों को छुड़ाने के लिए विद्रोहियों की शर्तों को मानती है या फिर किसी सैन्य विकल्प का चुनाव करती है। आने वाले कुछ दिन इन बंधक सैनिकों की सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होंगे।

 

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