Pakistan: कश्मीर पर शहबाज शरीफ का पुराना राग और भारत ने दिया करारा जवाब – The Hill News

Pakistan: कश्मीर पर शहबाज शरीफ का पुराना राग और भारत ने दिया करारा जवाब

नई दिल्ली। पड़ोसी देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर भारत के साथ द्विपक्षीय तनाव को हवा देने की कोशिश की है। हाल ही में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की एक सभा को संबोधित करते हुए शहबाज शरीफ ने कश्मीर को लेकर अपनी पुरानी और विवादित बयानबाजी को दोहराया है। उनके इस ताजा बयान ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए अक्सर कश्मीर मुद्दे का सहारा लेता है। शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में दावा किया कि कश्मीर एक दिन पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा, जो उनके एक और ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’ जैसा ही नजर आता है।

पीओके में आयोजित इस जनसभा के दौरान शहबाज शरीफ ने कश्मीरी लोगों के प्रति एकजुटता दिखाने का ढोंग किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान कश्मीरियों के साथ हर परिस्थिति में मजबूती के साथ खड़ा है। उनके अनुसार, जम्मू-कश्मीर विवाद का समाधान केवल वहां के लोगों की इच्छा के अनुरूप ही होना चाहिए। हालांकि, वास्तविकता यह है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लोग स्वयं पाकिस्तान के शासन और वहां की बदहाल आर्थिक स्थिति के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के दशकों पुराने प्रस्तावों का भी उल्लेख किया और कहा कि इन प्रस्तावों को लागू करके ही इस विवाद का अंत किया जा सकता है।

अपने भाषण के दौरान शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना का भी संदर्भ लिया। उन्होंने याद दिलाया कि जिन्ना ने इस क्षेत्र को पाकिस्तान की ‘लाइफ लाइन’ यानी जीवन रेखा बताया था। उनके इस बयान का उद्देश्य पीओके के लोगों के बीच अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करना और भारत के खिलाफ जहर उगलना था। शहबाज शरीफ ने कहा कि वे पाकिस्तानी नेतृत्व और वहां की आवाम की ओर से कश्मीर के लोगों के साथ खड़े होने का संदेश देने आए हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बात से अच्छी तरह वाकिफ है कि पाकिस्तान किस तरह आतंकवाद को बढ़ावा देकर इस क्षेत्र की शांति भंग करने की कोशिश करता रहा है।

इस संबोधन में शहबाज शरीफ ने मई 2025 में हुए भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिवसीय सैन्य संघर्ष का भी जिक्र किया। उन्होंने इस संक्षिप्त युद्ध को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के नाम से संबोधित करते हुए दावा किया कि इस संघर्ष ने कश्मीर मुद्दे को वैश्विक पटल पर दोबारा जीवित कर दिया है। उनके अनुसार, इस घटनाक्रम के बाद दुनिया भर में कश्मीर विवाद को लेकर एक बार फिर नई ताकत के साथ चर्चा शुरू हुई है। हालांकि, कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सैन्य उकसावे वाली गतिविधियों से पाकिस्तान ने केवल अपनी ही आर्थिक और वैश्विक स्थिति को नुकसान पहुँचाया है।

शहबाज शरीफ के इन दावों पर भारत सरकार ने हमेशा की तरह अपना कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार यह साफ किया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग थे, हैं और हमेशा बने रहेंगे। भारत का स्पष्ट कहना है कि पाकिस्तान को कश्मीर पर दावा करने का कोई कानूनी या नैतिक अधिकार नहीं है। भारत ने पाकिस्तान की इस आदत को उसकी आंतरिक विफलताओं को छिपाने का एक जरिया बताया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, जम्मू-कश्मीर का मामला भारत का आंतरिक विषय है और इसमें किसी भी बाहरी देश या संगठन के हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है।

भारत ने समय-समय पर पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि वह अपनी धरती पर पनप रहे आतंकवाद पर लगाम लगाए और सीमा पार से होने वाली घुसपैठ को रोके। शहबाज शरीफ द्वारा कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा बनाने की बात करना पूरी तरह से आधारहीन और हकीकत से परे है। भारत का कहना है कि अनुच्छेद 370 के हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में विकास की नई लहर आई है और वहां के लोग शांति व प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की यह बयानबाजी केवल उनके राजनीतिक अस्तित्व को बचाने की एक नाकाम कोशिश है।

शहबाज शरीफ के इस दौरे और उनके भड़काऊ भाषण ने एक बार फिर दक्षिण एशिया में शांति बहाली की संभावनाओं को कमजोर किया है। एक ओर जहाँ भारत अपनी अर्थव्यवस्था को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी शक्ति बनाने की दिशा में काम कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान आज भी पुराने और बेमानी विवादों में उलझा हुआ है। शहबाज शरीफ का यह बयान कि ‘कश्मीर एक दिन पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा’, उनके लिए एक ऐसे बुरे सपने की तरह है जो कभी हकीकत में नहीं बदल सकता। भारत ने कड़े शब्दों में यह संदेश दे दिया है कि पाकिस्तान अपनी सीमाओं के भीतर की समस्याओं पर ध्यान दे और कश्मीर पर अपनी नापाक नजरें हटा ले। कुल मिलाकर, शहबाज शरीफ का यह संबोधन केवल लफ्फाजी तक सीमित है और इसका वैश्विक कूटनीति पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ने वाला है। भारत अपनी अखंडता की रक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार है।

 

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