Uttarakhand: बापूग्राम वन भूमि विवाद प्रभावित परिवारों के पक्ष में उतरे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत – The Hill News

Uttarakhand: बापूग्राम वन भूमि विवाद प्रभावित परिवारों के पक्ष में उतरे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत

ऋषिकेश। उत्तराखंड की योग नगरी ऋषिकेश के बापूग्राम में वन भूमि विवाद को लेकर चल रहा आंदोलन अब और अधिक गर्माता जा रहा है। पिछले कई दिनों से अपनी छतों को बचाने की गुहार लगा रहे प्रभावित परिवारों के समर्थन में अब राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी कूद पड़े हैं। शुक्रवार को हरीश रावत बापूग्राम पहुँचे और धरने पर बैठे लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को सुना। इस दौरान उन्होंने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि दशकों से यहाँ बसे परिवारों को उनके आशियानों से उजाड़ना किसी पाप से कम नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री के इस दौरे से बापूग्राम बचाओ संघर्ष समिति के आंदोलन को नई राजनीतिक संजीवनी मिली है।

प्रभावित परिवारों को संबोधित करते हुए हरीश रावत ने आश्वासन दिया कि वे इस मानवीय संकट को लेकर चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मुख्य सचिव आनंदवर्धन से मुलाकात करेंगे और उन्हें बापूग्राम के हजारों परिवारों की पीड़ा और उनके संघर्ष से अवगत कराएंगे। हरीश रावत ने तर्क दिया कि जब कोई आबादी दशकों तक एक स्थान पर रहती है और वहां बुनियादी सुविधाएं पहुँच चुकी होती हैं, तो उसे कानूनी बारीकियों के नाम पर बेघर करना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए।

बापूग्राम बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले चल रही आमसभा और धरने के दौरान वक्ताओं ने एकता की शक्ति पर विशेष जोर दिया। समिति के पदाधिकारियों ने याद दिलाया कि बीती दो फरवरी को निकाली गई ऐतिहासिक महारैली ने सरकार और प्रशासन को जनता की ताकत का अहसास करा दिया है। हजारों की संख्या में सड़कों पर उतरे लोगों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी जमीन और मकान को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। वक्ताओं ने आंदोलनकारियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि यह जोश कम नहीं होना चाहिए और सरकार पर दबाव बनाए रखने के लिए विरोध के अलग-अलग स्वरूपों को जारी रखना होगा।

समिति के संयोजक रमेश जुगलान ने ऐतिहासिक तथ्यों को सामने रखते हुए कहा कि बापूग्राम के निवासी उत्तराखंड राज्य गठन के समय से ही इस क्षेत्र को ‘राजस्व ग्राम’ घोषित करने की मांग कर रहे हैं। दुर्भाग्यवश, अब तक किसी भी सरकार ने इस जायज मांग पर गंभीरता से विचार नहीं किया। उन्होंने कहा कि राजस्व ग्राम घोषित न होने के कारण ही आज वन भूमि का जिन्न बाहर निकल आया है और लोगों के आशियानों पर खतरा मंडरा रहा है। जुगलान ने क्षेत्रवासियों से अपील की कि वे एकजुट होकर तब तक संघर्ष करें जब तक कि सरकार उन्हें मालिकाना हक देने का ठोस आश्वासन नहीं दे देती।

आंदोलन से जुड़े राजपाल खरोला ने सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अब तक शासन की ओर से प्रभावित परिवारों के पक्ष में कोई भी सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया है, जिसके कारण जनता को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है। उन्होंने सुझाव दिया कि आंदोलन की धार को तेज करने के लिए हर दूसरे-तीसरे दिन मशाल रैली, कैंडल मार्च और अन्य प्रतीकात्मक विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। खरोला ने इस आंदोलन को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने के लिए स्थानीय पार्षदों की भूमिका की भी जमकर सराहना की।

बापूग्राम में चल रहा यह धरना प्रदर्शन अब एक बड़े सामाजिक मुद्दे का रूप ले चुका है। संघर्ष समिति ने धरने पर बैठने वाले लोगों की सुविधाओं का भी ध्यान रखा है और तेज धूप से बचने के लिए टेंट व अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं। महिलाओं और बुजुर्गों की बड़ी भागीदारी ने इस आंदोलन को और अधिक भावुक बना दिया है। लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से यहाँ घर बनाए हैं और अब बुढ़ापे में वे कहाँ जाएंगे।

हरीश रावत के इस दौरे के बाद अब गेंद सरकार के पाले में है। एक ओर जहाँ प्रशासन अदालती आदेशों और वन भूमि कानूनों का हवाला दे रहा है, वहीं दूसरी ओर हजारों परिवारों के बेघर होने का मानवीय पक्ष खड़ा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि हरीश रावत द्वारा इस मुद्दे को उठाने से सरकार पर दबाव बढ़ेगा। ऋषिकेश की इस महत्वपूर्ण बस्ती का भविष्य अब सरकार की इच्छाशक्ति और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा लिए जाने वाले निर्णयों पर टिका है। फिलहाल बापूग्राम के निवासी ‘लड़ेंगे और जीतेंगे’ के संकल्प के साथ अपने धरने पर डटे हुए हैं।

 

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