लुधियाना। पंजाब के औद्योगिक शहर लुधियाना में मानव तस्करी का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला उजागर हुआ है। शहर के व्यस्त सीएमसी चौक के समीप जागरूक नागरिकों की मुस्तैदी से बच्चों की खरीद-फरोख्त करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। लोगों ने संदिग्ध परिस्थितियों में एक महिला को नवजात बच्चे के साथ पकड़ा, जो उसे बेचने की कोशिश कर रही थी। इस घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और पुलिस ने एक डॉक्टर सहित गिरोह के कई सदस्यों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, सीएमसी चौक के पास कुछ लोगों ने एक महिला को देखा जिसके पास एक छोटा सा बच्चा था। बच्चा लगातार रो रहा था और महिला उसे चुप कराने के बजाय घबराहट में इधर-उधर देख रही थी। संदेह होने पर जब स्थानीय लोगों ने उस महिला को रोका और कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने जो सच बताया वह रोंगटे खड़े कर देने वाला था। महिला ने स्वीकार किया कि उसने इस नवजात बच्चे को 2 लाख 10 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि देकर खरीदा है।
पकड़ी गई महिला ने पुलिस को बताया कि वह मूल रूप से मोगा जिले की रहने वाली है और विशेष रूप से बच्चा खरीदने के लिए ही लुधियाना आई थी। स्थानीय लोगों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस के डिवीजन नंबर 3 को दी। सूचना मिलते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और महिला को अपनी हिरासत में ले लिया। पुलिस ने जब मामले की गहराई से जांच शुरू की, तो इस घिनौने धंधे की कड़ियां एक-एक कर खुलने लगीं।
पुलिस ने इस मामले में एक बीएएमएस (BAMS) डॉक्टर सहित कुल 8 लोगों के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा दर्ज किया है। मौके से ही पुलिस ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में छापेमारी की जा रही है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि यह बच्चा किसका है और इसे कहाँ से लाया गया था। साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या यह गिरोह पहले भी इस तरह की वारदातों को अंजाम दे चुका है।
लुधियाना पुलिस ने इसे एक संगठित मानव तस्करी गिरोह का हिस्सा बताया है। गिरफ्तार आरोपियों से गहनता से पूछताछ की जा रही है ताकि गिरोह के मुख्य सरगना और उनके नेटवर्क का पता लगाया जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नवजात बच्चों की इस तरह खरीद-फरोख्त एक गंभीर अपराध है और इसमें संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल नवजात बच्चे को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया है और उसे उचित चिकित्सीय देखभाल प्रदान की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर समाज में नैतिक मूल्यों के पतन और बच्चों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
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