Assam: चीन सीमा के पास पहली बार इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी पर उतरा विमान – The Hill News

Assam: चीन सीमा के पास पहली बार इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी पर उतरा विमान

डिब्रूगढ़। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को असम दौरे के दौरान रक्षा और सामरिक दृष्टि से एक नया इतिहास रचा। वे देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री बन गए हैं जिनका विमान डिब्रूगढ़-मोरान इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ईएलएफ) पर सफलतापूर्वक उतरा। प्रधानमंत्री ने चाबुआ एयरफील्ड से सी-130जे (C-130J) सुपर हर्कुलिस विमान के जरिए उड़ान भरी और मोरान में नवनिर्मित ईएलएफ पर लैंडिंग की। इस लैंडिंग का महत्व केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सैन्य और कूटनीतिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से चीन के साथ लगी सीमा के संदर्भ में।

पूर्वोत्तर भारत का यह पहला इमरजेंसी लैंडिंग पैच भारत की सामरिक शक्ति को नया विस्तार देता है। युद्ध या किसी आपातकालीन स्थिति के दौरान इस रनवे पर भारतीय वायुसेना के अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों और भारी मालवाहक जहाजों को उतारा जा सकता है। भौगोलिक स्थिति को देखें तो भारत का दक्षिण-पूर्वी इलाका सैन्य मोर्चे पर कुछ हद तक चुनौतीपूर्ण माना जाता है। ऐसे में इस तरह की सुविधाओं का विकास चीन की संभावित आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए बेहद जरूरी है।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर चीन की वायु शक्ति का मुकाबला करने के लिए भारत के पास पहले से ही हाशिमारा, तेजपुर, जोरहाट और चबुआ जैसे प्रमुख एयरबेस मौजूद हैं। हालांकि, युद्ध की स्थिति में स्थाई एयरबेस हमेशा दुश्मन के पहले निशाने पर होते हैं। यदि मुख्य रनवे क्षतिग्रस्त होते हैं, तो यह इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी फाइटर जेट्स को तैनात करने और ऑपरेशन जारी रखने के लिए एक सुरक्षित विकल्प प्रदान करती है। चीन की ओर सीमा पार कम से कम सात सक्रिय एयरबेस हैं, जिसे देखते हुए भारत को अपने संसाधनों के विविधीकरण की आवश्यकता थी।

यह ईएलएफ केवल विमान उतारने के लिए ही नहीं है, बल्कि इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यहां फाइटर जेट्स में तुरंत ईंधन भरा जा सके और उन्हें दोबारा हथियारों से लैस कर युद्ध के लिए रवाना किया जा सके। आपातकाल के समय इस राष्ट्रीय राजमार्ग को ट्रैफिक के लिए पूरी तरह सील कर दिया जाता है और सुरक्षा बल पूरे क्षेत्र को अपने नियंत्रण में ले लेते हैं। इसके अलावा, प्राकृतिक आपदाओं या मानवीय संकट के समय भी इस रनवे का उपयोग राहत और बचाव कार्यों के लिए प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। प्रधानमंत्री मोदी की इस लैंडिंग ने भारतीय वायुसेना की आपदा और युद्धकालीन तैयारी का सफल परीक्षण कर दुनिया को एक कड़ा संदेश दिया है।

 

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