नई दिल्ली। भारत अपनी हवाई रक्षा और मारक क्षमता को अभेद्य बनाने के लिए एक और बड़ा कदम उठा रहा है। रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने राफेल लड़ाकू विमानों के लिए लंबी दूरी की घातक स्कैल्प (SCALP) मिसाइलों और रूस निर्मित एस-400 (S-400) एरियल शील्ड सिस्टम के लिए अतिरिक्त मिसाइलों की खरीद को औपचारिक मंजूरी प्रदान कर दी है। यह निर्णय भारत की सामरिक शक्ति को उस समय और अधिक बल देगा जब देश अपनी सीमाओं पर आधुनिक तकनीक और हथियारों के आधुनिकीकरण पर जोर दे रहा है।
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि 114 राफेल जेट विमानों की खरीद के लिए एक पारदर्शी सरकारी स्तर का समझौता (G2G Deal) होगा, जिसमें किसी बिचौलिए की भूमिका नहीं होगी। उन्होंने एक अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य की पुष्टि करते हुए कहा कि यह पहली बार होगा जब राफेल फाइटर जेट्स का निर्माण फ्रांस के बाहर, यानी भारत में ही किया जाएगा। इन विमानों की डिलीवरी साल 2028 से शुरू होगी, जिसमें पहले नेवल (नौसेना) वेरिएंट और उसके बाद वायुसेना (IAF) वेरिएंट को शामिल किया जाएगा। सबसे बड़ी बात यह है कि इस बार भारत के पास विमान के रडार और वेपन सिस्टम में अपनी स्वदेशी मिसाइलों और प्रणालियों को स्वतंत्र रूप से जोड़ने (इंटीग्रेट) का पूरा अधिकार होगा, जो पिछली डील्स में सोर्स कोड न मिलने के कारण सीमित था।
इस सौदे में शामिल स्कैल्प मिसाइलें अपनी अचूक मारक क्षमता के लिए जानी जाती हैं। 250 किलोमीटर की रेंज वाली ये मिसाइलें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी मुख्यालयों को नेस्तनाबूद करने में निर्णायक साबित हुई थीं। यह मिसाइल जीपीएस, इनर्शियल नेविगेशन और इन्फ्रारेड इमेजिंग जैसी अत्याधुनिक प्रणालियों से लैस है, जो दुश्मन के ठिकानों पर पिन-पॉइंट स्ट्राइक करने में सक्षम है। वहीं, एस-400 सिस्टम ने भी पिछले वर्ष पाकिस्तान के हवाई हमलों को नाकाम कर अपनी उपयोगिता सिद्ध की थी, जिसकी क्षमता को और बढ़ाने के लिए नई मिसाइलें खरीदी जा रही हैं।
विदेशी कंपनियों के सहयोग के मोर्चे पर भी अच्छी खबर आई है। फ्रांसीसी इंजन निर्माता कंपनी सफरान (Safran) के सीईओ ओलिवियर एंड्रीज ने घोषणा की है कि वे भारत में ही इंजन असेंबली लाइन स्थापित करने के लिए तैयार हैं। सफरान न केवल राफेल के लिए एम-88 इंजन बनाएगी, बल्कि स्थानीय सप्लायर्स से पुर्जे खरीदकर भारत के एयरोस्पेस उद्योग को भी मजबूती प्रदान करेगी। यह कदम भारत के ‘आत्मनिर्भर रक्षा’ अभियान को गति देगा और भविष्य में भारत को रक्षा विनिर्माण का एक बड़ा केंद्र बनाने में सहायक होगा। 114 राफेल विमानों की यह खेप न केवल वायुसेना की स्क्वाड्रन ताकत बढ़ाएगी, बल्कि भारतीय सैन्य शक्ति को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।