शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) समाप्त किए जाने के बावजूद राज्य में पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) और अन्य सभी प्रमुख कल्याणकारी योजनाएं पहले की तरह ही चलती रहेंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार अपने संसाधनों के माध्यम से जनता के अधिकारों और हितों की रक्षा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। दिल्ली रवाना होने से पहले मीडिया से बात करते हुए सुक्खू ने कहा कि उनकी सरकार किसी भी परिस्थिति में जनहित के साथ समझौता नहीं करेगी।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने विपक्षी दल पर हमला बोलते हुए कहा कि यदि वर्तमान में भाजपा सत्ता में होती, तो वे ओपीएस को समाप्त कर यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) लागू कर चुके होते। इससे सरकारी कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा पूरी तरह समाप्त हो जाती। सुक्खू ने कहा कि वे स्वयं एक साधारण परिवार से आते हैं, इसलिए आम जनता की परेशानियों को बेहतर तरीके से समझते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के संसाधनों को सशक्त बनाना और विकास की गति को और तेज करना है।
प्रदेश की कमजोर आर्थिक स्थिति के लिए सुक्खू ने पूर्ववर्ती जयराम ठाकुर सरकार के कार्यकाल को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि 2018 से 2021 के बीच भाजपा सरकार के दौरान हुए वित्तीय कुप्रबंधन और फिजूलखर्ची ने राज्य को संकट में डाला है। सुक्खू ने बताया कि पूर्व भाजपा सरकार को आरडीजी के रूप में लगभग 54,000 करोड़ रुपये और जीएसटी मद में 16,000 करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन इस भारी धनराशि का उपयोग पूंजीगत विकास के स्थान पर केवल ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार ने लगभग 1,000 करोड़ रुपये उन इमारतों पर खर्च कर दिए जो आज खाली और अनुपयोगी पड़ी हैं।
आरडीजी समाप्त किए जाने के केंद्र के निर्णय को सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश के प्रति ‘सौतेला व्यवहार’ करार दिया। उन्होंने कहा कि सालाना लगभग 10,000 करोड़ रुपये का यह नुकसान राज्य के बजट पर गंभीर असर डालेगा। भौगोलिक परिस्थितियों के कारण हिमाचल एक राजस्व घाटा राज्य बना रहेगा, ऐसे में अनुदान की बहाली अनिवार्य है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि वे इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से भेंट करेंगे और राज्य के हक के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ेंगे।
भाजपा विधायकों को वित्तीय प्रस्तुति के लिए आमंत्रित न किए जाने के आरोपों को भी सुक्खू ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा नेताओं को व्यक्तिगत रूप से लिखित निमंत्रण भेजे गए थे, लेकिन उन्होंने जानबूझकर बैठक से दूरी बनाई। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर प्रदेश के हित और जनता के कल्याण के लिए एकजुट होकर कार्य करें। सुक्खू ने भाजपा नेताओं से आग्रह किया कि वे जनता को गुमराह करने के बजाय केंद्र सरकार से राज्य के अधिकारों की लड़ाई में राज्य सरकार का सहयोग करें।
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