शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने आगामी विधानसभा बजट सत्र के मद्देनजर शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। सत्र की व्यस्तता और सदन में पूछे जाने वाले सवालों की त्वरित तैयारी के लिए स्कूल शिक्षा निदेशालय ने सभी प्रस्तावित छुट्टियों और दौरों (टूअर) पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। गौरतलब है कि प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू होने जा रहा है, जिसके लिए विभाग अपनी तैयारियों को पुख्ता करने में जुट गया है।
स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली द्वारा इस संबंध में मंगलवार को आधिकारिक पत्र जारी किया गया है। आदेश के अनुसार, बजट सत्र के दौरान अधिकारियों और उनके अधीन कार्यरत कर्मचारियों को रविवार या अन्य सार्वजनिक अवकाश के दिनों में भी आवश्यकतानुसार ड्यूटी पर बुलाया जा सकता है। विधानसभा कार्यों से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए काम के घंटे भी तय कर दिए गए हैं। उन्हें सत्र के दौरान रोजाना सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक अनिवार्य रूप से कार्यालय में उपस्थित रहना होगा, ताकि किसी भी सूचना या उत्तर की आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सदन में विभाग से संबंधित पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर समयबद्ध और पूरी सटीकता के साथ दिए जाने चाहिए। इसके लिए अधिकारियों को पिछले तीन वर्षों का विस्तृत विवरण तैयार रखने को कहा गया है। इस डेटा में विभाग में हुई नई भर्तियां, पदोन्नतियां, सेवानिवृत्ति और वर्तमान में रिक्त पड़े पदों का पूरा ब्यौरा शामिल होना चाहिए। साथ ही, पिछले तीन वर्षों में किए गए शिक्षकों के तबादलों और विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों में तैनात किए गए शिक्षकों की संख्यात्मक जानकारी भी मांगी गई है।
सदन में अक्सर शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों की कमी का मुद्दा प्रमुखता से उठता है। इसे देखते हुए निदेशालय ने राज्य लोक सेवा आयोग और राज्य चयन आयोग को भेजी गई नई भर्तियों की वर्तमान स्थिति की जानकारी भी अपडेट रखने को कहा है। इसके अलावा कंप्यूटर शिक्षकों, पीटीए और एसएमसी शिक्षकों से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर भी गहन रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
निदेशालय ने चेतावनी दी है कि विधानसभा बिजनेस से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी संबंधित अनुभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हर तरह की जानकारी और आंकड़े व्यवस्थित रखें ताकि सत्र के दौरान सरकार को किसी भी असहज स्थिति का सामना न करना पड़े। बजट सत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए वर्तमान में पूरे शिक्षा विभाग को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
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