देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप उत्तराखंड के शहरों को आधुनिक और सुव्यवस्थित बनाने के लिए आवास विभाग ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। इसी कड़ी में भारत सरकार की ‘अमृत 1.0’ योजना के तहत प्रस्तावित हरिद्वार और रुड़की महायोजना-2041 के प्रारूप पर राज्य सचिवालय में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता आवास सचिव आर. राजेश कुमार ने की, जिसमें नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
बैठक के दौरान हरिद्वार और रुड़की क्षेत्रों के आगामी दशकों के विकास का खाका खींचने वाली इस महायोजना के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार किया गया। चर्चा के मुख्य बिंदुओं में भूमि उपयोग का सही निर्धारण, आवासीय और औद्योगिक क्षेत्रों का संतुलित विकास, आधुनिक यातायात प्रबंधन, आधारभूत सुविधाओं का विस्तार और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई। मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक शशि मोहन श्रीवास्तव ने महायोजना के प्रारूप पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी और अब तक हुई प्रगति के साथ आगामी चरणों की महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
शहरी विकास की इस प्रक्रिया में सार्वजनिक सहभागिता को विशेष महत्व दिया गया है। बैठक में यह तथ्य सामने आया कि हरिद्वार और रुड़की महायोजना-2041 के प्रारूप पर जनता की राय जानने के लिए सार्वजनिक सुनवाई की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। इस प्रक्रिया के दौरान हरिद्वार महायोजना के संबंध में लगभग 350 और रुड़की महायोजना के लिए करीब 550 सुझाव और आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। आवास सचिव आर. राजेश कुमार ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि जनता से मिले प्रत्येक सुझाव और आपत्ति का पूरी पारदर्शिता और नियमानुसार परीक्षण किया जाए। उन्होंने कहा कि महायोजना को जन-अपेक्षाओं के अनुरूप और पूरी तरह व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए।
आर. राजेश कुमार ने बैठक में कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल भौतिक निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों को उच्च जीवन स्तर प्रदान करना और शहरों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी तकनीकी और कानूनी औपचारिकताएं समयबद्ध तरीके से पूर्ण की जाएं ताकि महायोजना को शीघ्र अंतिम रूप देकर शासन से अनुमोदन प्राप्त किया जा सके। नियोजित विकास की यह पहल हरिद्वार और रुड़की को न केवल बेहतर बुनियादी ढांचा देगी, बल्कि इन शहरों को आधुनिक शहरी केंद्रों के रूप में नई पहचान भी दिलाएगी। बैठक में नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे और उन्होंने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर अपने विचार साझा किए।