Himachal: तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा को मिला पहला ग्रैमी अवार्ड शांति और करुणा के संदेश की वैश्विक जीत – The Hill News

Himachal: तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा को मिला पहला ग्रैमी अवार्ड शांति और करुणा के संदेश की वैश्विक जीत

धर्मशाला, 02 फरवरी।

तिब्बती आध्यात्मिक धर्मगुरु दलाई लामा ने संगीत जगत के सबसे प्रतिष्ठित ‘ग्रैमी अवार्ड’ को जीतकर एक नया इतिहास रच दिया है। उन्हें यह सम्मान उनके स्पोकन वर्ड एल्बम ‘मेडिटेशन्स: द रिफ्लेक्शन्स ऑफ हिज होलीनेस द दलाई लामा’ के लिए प्रदान किया गया है। इस उपलब्धि पर दलाई लामा ने गहरी प्रसन्नता व्यक्त की है। उनका मानना है कि इस वैश्विक सम्मान के माध्यम से प्यार, शांति और करुणा का उनका मानवीय संदेश पूरी दुनिया के कोने-कोने तक और अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।

दलाई लामा के इस एल्बम को 1 फरवरी 2026 को अमेरिका के लॉस एंजिल्स में आयोजित 68वें वार्षिक ग्रैमी अवार्ड्स में ‘बेस्ट ऑडियो बुक, नरेशन और स्टोरीटेलिंग रिकॉर्डिंग’ की श्रेणी में नामांकित किया गया था। इस विशेष एल्बम की तैयारी में दलाई लामा ने विश्व प्रसिद्ध सरोद वादक अमजद अली खान और उनके पुत्रों अमान अली बंगश व अयान अली बंगश के साथ मिलकर काम किया है। यह एल्बम केवल एक संगीत रचना नहीं, बल्कि शांति, दया और उम्मीद की भावनाओं को समर्पित शब्दों और संगीत का एक अनूठा संगम है।

अपनी इस ऐतिहासिक जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए दलाई लामा ने कहा कि वे इस सम्मान को अत्यंत आभार और विनम्रता के साथ स्वीकार करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इसे अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं मानते, बल्कि इसे मानवता के प्रति हमारी साझा वैश्विक जिम्मेदारी की एक पहचान के रूप में देखते हैं। दलाई लामा ने जोर देकर कहा कि आज के समय में शांति, दया, पर्यावरण की सुरक्षा और पूरी मानवता की एकता की समझ धरती पर मौजूद सभी आठ अरब लोगों की सामूहिक भलाई के लिए अनिवार्य है। उन्होंने ग्रैमी अवार्ड को एक ऐसा मंच बताया जो इन सकारात्मक संदेशों को अधिक से अधिक लोगों तक ले जाने में एक सेतु का कार्य करेगा।

निर्वासित तिब्बती संसद ने इस गौरवपूर्ण अवसर पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए इसे एक ऐतिहासिक क्षण करार दिया है। संसद के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह न केवल तिब्बतियों के लिए, बल्कि पूरी मानवता के लिए खुशी का विषय है। उन्होंने दलाई लामा को बधाई देते हुए कहा कि ग्रैमी जैसा प्रतिष्ठित मंच अब उनके सार्वभौमिक भाईचारे के संदेश को पूरी दुनिया तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगा। वहीं, तिब्बत म्यूजियम के निदेशक तेनजिन टापडेन ने कहा कि ‘लोसर’ (तिब्बती नववर्ष) के त्योहार से ठीक पहले आई यह खबर शांति पसंद करने वाले सभी देशों के लिए एक बड़ी सौगात है।

इस अवार्ड के राजनीतिक महत्व पर बात करते हुए ‘स्टूडेंट्स फॉर फ्री तिब्बत’ के प्रवक्ता तेनजिन लेकधेन ने कहा कि जब नामांकन की घोषणा हुई थी, तभी से तिब्बत के भीतर और बाहर रहने वाले तिब्बतियों में जबरदस्त उत्साह था। उन्होंने इसे चीन के लिए एक कड़ा संदेश बताया। लेकधेन के अनुसार, चीन वैश्विक स्तर पर दलाई लामा की छवि को धूमिल करने का लगातार प्रयास करता रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिला यह प्रतिष्ठित सम्मान उन साजिशों का करारा जवाब है। यह अवार्ड सिद्ध करता है कि दलाई लामा के प्रति दुनिया का सम्मान और उनकी प्रासंगिकता आज भी अडिग है। इस जीत ने तिब्बतियों के साथ-साथ दुनिया भर के उनके समर्थकों में एक नई ऊर्जा भर दी है।

 

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