Uttarakhand: दून में मिले कोरोना के दो मामले, लेकिन वेरिएंट का पता नहीं

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देहरादून। दून में कोरोना के दो मामले सामने आए हैं, लेकिन संक्रमित मरीजों के सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग नहीं हो पाई है। सीक्वेंसिंग नहीं करवाने का अजब कारण बताया गया है कि कोरोना पीड़ितों की संख्या कम और लैब में उतने सैंपल नहीं पहुंच रहे हैं जितना जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए जरूरत होती है। इस एकमात्र सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग में कई हजार रुपये का खर्च आएगा। बताया गया कि लैब में कर्मचारियों की भी कमी बनी हुई है। जीनोम सीक्वेंसिंग में विलंब का यह भी एक कारण है।

कोरोना के नए वेरिएंट की पहचान के लिए जिस जीनोम सीक्वेंसिंग की बात बार-बार की जा रही है, वह प्रक्रिया बहुत खर्चीली है। जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए आठ, 16, 40 व 80 सैंपल की किट आती है। दून मेडिकल कॉलेज में अभी आठ सैंपल वाली किट का उपयोग किया जा रहा है। यानी एक बार में आठ सैंपल को प्रोसेस किया जाता है।

चकराता रोड निवासी 77 वर्षीय बुजुर्ग के सैंपल की भी जीनोम सीक्वेंसिंग नहीं हो पाई है। संबंधित अस्पताल को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए कहा गया तो पता लगा कि कोरोना जांच के लिए सैंपल दिल्ली भेजा गया था। लैब ने कोरोना की रिपोर्ट देकर सैंपल नष्ट कर दिया।

जिला सर्विलांस अधिकारी डा. सीएस रावत का कहना है कि स्पष्ट निर्देश हैं कि हर पॉजिटिव सैंपल की अनिवार्य रूप से जीनोम सीक्वेंसिंग कराई जाएगी। ऐसे में अस्पताल को इसे लेकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। इसकी पूरी जवाबदेही अस्पताल की है।

 

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