नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन के लिए समय अच्छा नहीं चल रहा है। एक तरफ भारतीय टीम इंग्लैंड की चुनौतियों का सामना कर रही है, वहीं दूसरी ओर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने जिम्बाब्वे दौरे के लिए टीम इंडिया का ऐलान कर दिया है। इस टीम में संजू सैमसन का नाम न होना क्रिकेट गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। इंग्लैंड दौरे पर दूसरे टी20 मैच की प्लेइंग-11 से बाहर किए जाने के बाद अब पूरी टीम से ही उनका पत्ता कटना, संजू के अंतरराष्ट्रीय करियर के लिए एक बड़ी चेतावनी माना जा रहा है।
इस फैसले के बाद अब यह सवाल तेजी से उठने लगा है कि क्या संजू सैमसन का टीम इंडिया के साथ सफर अब समाप्ति की ओर है? यह सवाल इसलिए भी वाजिब लग रहा है क्योंकि संजू की सबसे बड़ी कमजोरी उनका निरंतर अच्छा प्रदर्शन न कर पाना रही है। हालांकि, वे टी20 वर्ल्ड कप की टीम का हिस्सा थे और वहां सफल भी रहे, लेकिन उसके बाद आयरलैंड और इंग्लैंड के दौरों पर वे उस लय को बरकरार नहीं रख सके। इसी खराब फॉर्म का नतीजा रहा कि उन्हें पहले प्लेइंग-11 से बाहर किया गया और अब जिम्बाब्वे जाने वाली टीम में भी उन्हें जगह नहीं दी गई।
बीसीसीआई की चुप्पी बढ़ा रही संशय
जिम्बाब्वे दौरे के लिए टीम का चयन करते समय बीसीसीआई ने जो प्रेस रिलीज जारी की है, उसमें संजू सैमसन को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। आमतौर पर जब किसी सीनियर खिलाड़ी को टीम में शामिल नहीं किया जाता, तो बोर्ड ‘आराम’ (Rest) शब्द का प्रयोग करता है। लेकिन संजू के मामले में ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की गई है। चूंकि संजू सैमसन वर्तमान में केवल टी20 फॉर्मेट में ही सक्रिय हैं, ऐसे में एक ही फॉर्मेट खेलने वाले खिलाड़ी को आराम देने का तर्क भी तर्कसंगत नहीं लगता।
भविष्य की टीम में संजू फिट नहीं?
जिम्बाब्वे जैसी सीरीज के लिए अक्सर भारतीय चयनकर्ता एक ‘बी’ टीम चुनते हैं, जिसमें उन युवा खिलाड़ियों को आजमाया जाता है जिन्हें वे भविष्य के सितारों के रूप में देख रहे होते हैं। इस बार भी कई नए चेहरों को मौका दिया गया है, लेकिन संजू सैमसन का इस फेहरिस्त से गायब होना संकेत देता है कि सेलेक्टर्स अब उनसे आगे की सोच रहे हैं। आमतौर पर जब कोई खिलाड़ी खराब फॉर्म से जूझ रहा होता है, तो उसे ऐसी सीरीज में मौका देकर उसका आत्मविश्वास वापस लाने की कोशिश की जाती है, लेकिन संजू के साथ ऐसा नहीं किया गया।
क्यों मुश्किल लग रही है संजू की वापसी?
चयनकर्ताओं के कड़े रुख और टीम के मौजूदा समीकरण को देखते हुए संजू के लिए वापसी की राह काफी कठिन नजर आती है। इसके पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
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निरंतरता का अभाव: संजू सैमसन के साथ सबसे बड़ी समस्या प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव है। यही कारण था कि सूर्यकुमार यादव के बाद जब नए कप्तान की चर्चा शुरू हुई, तो संजू पिछड़ गए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चयनकर्ताओं का मानना है कि वे भरोसेमंद विकल्प नहीं हैं।
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विकल्पों की भरमार: भारतीय टीम के पास वर्तमान में ओपनिंग और मध्यक्रम के लिए कई प्रतिभाशाली विकल्प मौजूद हैं। अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ी टीम में जगह बना चुके हैं, जबकि यशस्वी जायसवाल और शुभमन गिल जैसे धाकड़ खिलाड़ी पहले से ही कतार में हैं।
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उम्र और प्रतिस्पर्धा: बढ़ती उम्र के साथ संजू के पास खुद को साबित करने के मौके कम होते जा रहे हैं। विकेटकीपर के रूप में ऋषभ पंत और ईशान किशन के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने उनकी राह और मुश्किल कर दी है।
हालांकि, क्रिकेट को अनिश्चितताओं का खेल कहा जाता है और संजू की प्रतिभा पर किसी को शक नहीं है। वे घरेलू क्रिकेट या आईपीएल में शानदार प्रदर्शन कर फिर से चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींच सकते हैं। लेकिन फिलहाल, जिम्बाब्वे दौरे से उनकी अनुपलब्धता यह साफ करती है कि टीम मैनेजमेंट अब कड़े और कंक्रीट फैसले लेने के मूड में है। आने वाला समय ही बताएगा कि क्या संजू फिर से नीली जर्सी में वापसी कर पाएंगे या उनका अंतरराष्ट्रीय अध्याय यहीं बंद हो जाएगा।