Uttarakhand: जेपी नड्डा और पुष्कर सिंह धामी ने दिया परोपकार का संदेश

हरिद्वार। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज में आयोजित ‘दधीचि अंगदान संकल्प अभियान’ के तहत एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिरकत की। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य समाज में अंगदान के प्रति व्याप्त भ्रांतियों को दूर करना और इसे एक जनआंदोलन का रूप देना था। इस अवसर पर देशभर से आए चिकित्सा विशेषज्ञों और साधकों की उपस्थिति में सैकड़ों लोगों ने मानवता की सेवा के लिए मरणोपरांत अंगदान करने का सामूहिक संकल्प लिया।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने अपने संबोधन में कहा कि अंगदान केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानव सेवा का सर्वोच्च कार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसके माध्यम से हम उन लोगों को नया जीवन प्रदान कर सकते हैं जो अंग विफलता के कारण मृत्यु के कगार पर हैं। नड्डा ने कहा कि भारत सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाने के लिए निरंतर काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के स्वास्थ्य ढांचे में व्यापक सुधार किए गए हैं, जिसमें अंग प्रत्यारोपण की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक संस्थागत नेटवर्क विकसित किया गया है। उन्होंने खुशी जताई कि जागरूकता बढ़ने से देश में अंगदान करने वालों की संख्या में संतोषजनक वृद्धि हो रही है।

सनातन संस्कृति और अंगदान का संबंध
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि त्याग और सेवा हमारी सनातन संस्कृति के मूल में है। उन्होंने महर्षि दधीचि और राजा शिवि जैसे महान व्यक्तित्वों का उदाहरण देते हुए बताया कि परोपकार के लिए अपना सर्वस्व दान कर देना भारत की प्राचीन गौरवशाली गाथाओं का हिस्सा रहा है। धामी ने कहा कि यदि हमारे जाने के बाद शरीर का कोई हिस्सा किसी अन्य व्यक्ति के काम आ सके, तो यह सबसे बड़ी ईश्वर सेवा है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि उत्तराखंड सरकार राज्य में अंगदान और प्रत्यारोपण की प्रक्रियाओं को सरल और सुव्यवस्थित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि दून मेडिकल कॉलेज में राज्य के पहले सरकारी ऊतक प्रत्यारोपण केंद्र (Tissue Transplant Center) का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा, जिला स्तर पर अंगदान केंद्रों और अंग बैंकों के नेटवर्क को विस्तारित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अंगदान की प्रक्रिया में तेजी लाने और अंगों के सुरक्षित परिवहन के लिए प्रशासन, पुलिस और परिवहन विभाग के बीच बेहतर तालमेल बिठाया जाएगा, ताकि समय की बर्बादी न हो।

अभियान की मुख्य बातें और संकल्प

  • लक्ष्य: अंगदान को केवल अस्पताल तक सीमित न रखकर हर घर तक पहुंचाना और इसे जनआंदोलन बनाना।

  • संस्थागत ढांचा: दून मेडिकल कॉलेज में प्रथम सरकारी ऊतक प्रत्यारोपण केंद्र की स्थापना।

  • जागरूकता: ‘हम बदलेंगे तो युग बदलेगा’ के मंत्र के साथ गायत्री परिवार द्वारा सामाजिक चेतना का प्रसार।

  • समन्वय: अंगों के परिवहन (Green Corridor) के लिए पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय।

  • सहभागिता: संगोष्ठी में देशभर के चिकित्सकों और समाजसेवियों द्वारा अनुभवों का साझाकरण।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति चिन्मय पण्ड्या ने ‘यज्ञ’ की व्याख्या करते हुए इसे एक जीवन पद्धति बताया। उन्होंने कहा कि दूसरों के कल्याण के लिए अपने संसाधनों और समय का समर्पण ही वास्तविक यज्ञ है। संगोष्ठी के दौरान शांतिकुंज के आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सभी उपस्थित लोगों को अंगदान का संकल्प दिलाया।

इस महत्वपूर्ण आयोजन में आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक, रामकृष्ण मिशन के स्वामी दयामूर्त्यानंद, अनिल कुमार, पद्मश्री नीलेश मांडलेवाला और विजय धस्माना सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। वक्ताओं ने अंगदान के कानूनी और वैज्ञानिक पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की और समाज के हर वर्ग से इस पुनीत कार्य में जुड़ने की अपील की। मुख्यमंत्री ने अंत में पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के विचारों को याद करते हुए कहा कि सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से होती है।

 

Pls read:Uttarakhand: औद्योगिक प्रगति और सुशासन से विकसित उत्तराखंड का सपना होगा साकार बोले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *