लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और जातिगत भावनाओं को ठेस पहुँचाने वालों के खिलाफ राज्य सरकार ने अपना रुख और कड़ा कर लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देशों के बाद राजधानी लखनऊ के हजरतगंज थाने में ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर आने वाली फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के निर्देशक और उनकी पूरी टीम के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। राज्य प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था और आपसी भाईचारे के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी तत्व को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह मनोरंजन जगत से ही क्यों न जुड़ा हो। यह कार्रवाई सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य समाज में नफरत फैलाने वाली गतिविधियों पर अंकुश लगाना है।
अभिनेता मनोज बाजपेयी की मुख्य भूमिका वाली यह फिल्म अपनी रिलीज से पहले ही विवादों के घेरे में आ गई है। हजरतगंज कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह ने स्वयं इस मामले में वादी बनकर प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस का आरोप है कि फिल्म के शीर्षक और उसके प्रचारित किए जा रहे कंटेंट में एक जाति विशेष, विशेष रूप से ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ अत्यंत अपमानजनक और अभद्र टिप्पणियां की गई हैं। पुलिस के अनुसार, फिल्म का मुख्य उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों के बीच नफरत पैदा करना, वैमनस्यता फैलाना और शांति व्यवस्था को भंग करना प्रतीत होता है। फिल्म के निर्देशक नीरज पांडेय और उनकी टीम पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196 (विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता बढ़ाना), धारा 299 (धार्मिक विश्वासों का अपमान करना), धारा 352 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान) और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) एक्ट की धारा 66 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
हजरतगंज थाना प्रभारी विक्रम सिंह ने बताया कि नेटफ्लिक्स और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस फिल्म का जो ट्रेलर और प्रचार सामग्री प्रसारित की जा रही है, वह प्रथम दृष्टया बेहद आपत्तिजनक है। उन्होंने कहा कि फिल्म का शीर्षक ही एक समुदाय विशेष को लक्षित करके उसे नीचा दिखाने और अपमानित करने के इरादे से रखा गया है। फिल्म के नाम में ‘घूसखोर’ शब्द को ‘पंडत’ के साथ जोड़ना सीधे तौर पर जातिगत भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर इस कंटेंट को लेकर हो रही तीखी प्रतिक्रियाओं का संज्ञान लिया और पाया कि इससे समाज का एक बड़ा वर्ग आक्रोशित है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में किसी भी व्यक्ति या संस्था को यह अधिकार नहीं है कि वह कला या अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में किसी की धार्मिक या जातिगत आस्था का अपमान करे। शासन की ओर से कहा गया है कि इस तरह के कंटेंट से न केवल सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुँचता है, बल्कि इससे कानून-व्यवस्था के लिए भी बड़ी चुनौतियां खड़ी हो जाती हैं। लखनऊ पुलिस ने पाया कि ब्राह्मण समाज और कई अन्य सामाजिक संगठन इस फिल्म के विरोध में सड़कों पर उतरने और उग्र प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे थे। स्थिति की संवेदनशीलता और सार्वजनिक शांति को बनाए रखने के लिए पुलिस ने तत्काल एफआईआर दर्ज करने का निर्णय लिया।
फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के ट्रेलर में दिखाए गए संवादों और दृश्यों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जांच अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक फिल्म का नाम नहीं है, बल्कि यह एक सोची-समझी कोशिश है जिससे एक पारंपरिक और सम्मानित पहचान को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया जा सके। इस तरह की सामग्री से युवाओं और समाज के अन्य हिस्सों में गलत संदेश जाता है, जिससे आपसी मतभेद बढ़ने का खतरा रहता है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वे पूरी फिल्म की सामग्री और इसके पीछे के इरादों की गहराई से जांच कर रहे हैं।
इस कानूनी कार्रवाई के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने भी इस कदम को उचित बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि किसी भी समुदाय के सम्मान के साथ खिलवाड़ करना गलत है और ऐसी फिल्मों पर रोक लगाना जरूरी है जो समाज में दरार पैदा करती हैं। मायावती के इस समर्थन से यह साफ हो गया है कि जातिगत और धार्मिक भावनाओं के मुद्दे पर राज्य के विभिन्न दल भी एकजुट नजर आ रहे हैं।
लखनऊ पुलिस की साइबर सेल और विवेचना टीम अब इस मामले में डिजिटल साक्ष्य जुटाने में लगी है। नेटफ्लिक्स को भी इस संबंध में नोटिस भेजा जा सकता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन नियमों के तहत इस तरह के आपत्तिजनक शीर्षक और सामग्री को मंच प्रदान किया गया। नीरज पांडेय और उनकी यूनिट के खिलाफ दर्ज इस मुकदमे ने मनोरंजन जगत में एक नई बहस छेड़ दी है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा कहां तक होनी चाहिए। हजरतगंज पुलिस का कहना है कि विवेचना के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की गिरफ्तारी और कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
प्रशासन ने यह भी चेतावनी दी है कि केवल लखनऊ ही नहीं, बल्कि प्रदेश के किसी भी हिस्से में यदि इस फिल्म या इसके कंटेंट के कारण माहौल खराब होता है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने पहले भी कई फिल्मों और वेब सीरीज के विवादित कंटेंट पर कड़ा रुख अपनाया है, और ‘घूसखोर पंडत’ के खिलाफ यह कार्रवाई उसी कड़ी का हिस्सा है। फिलहाल, हजरतगंज पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस कंटेंट को जानबूझकर विवाद पैदा करने और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए बनाया गया था। समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए यह मुकदमा दर्ज किया गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस अब इस मामले के हर तकनीकी और कानूनी पहलू की सूक्ष्मता से जांच कर रही है ताकि दोषियों को कानून के कठघरे में खड़ा किया जा सके।