Uttarakhand: हरिद्वार में स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज की प्रतिमा का अनावरण और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का उद्घोष – The Hill News

Uttarakhand: हरिद्वार में स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज की प्रतिमा का अनावरण और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का उद्घोष

हरिद्वार। उत्तराखंड की पावन नगरी हरिद्वार के सप्तऋषि क्षेत्र में स्थित भारत माता मंदिर परिसर में एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक समागम का सफलतापूर्वक समापन हुआ। ब्रह्मलीन गुरुदेव स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज की समाधि मंदिर में उनकी भव्य प्रतिमा की स्थापना के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय समारोह के अंतिम दिन श्रद्धा और राष्ट्रभक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। शुक्रवार को आयोजित मुख्य समारोह में देश के शीर्ष राजनेताओं, केंद्रीय मंत्रियों और प्रख्यात संत समाज ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और महाराज की प्रतिमा का विधिवत अनावरण किया गया।

इस गरिमामय अवसर पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने समाधि स्थल पर पहुंचकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज सहित देश के विभिन्न कोनों से आए संतों ने इस क्षण को सनातन संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपरा के लिए एक मील का पत्थर बताया। तीन दिनों तक चले इस आयोजन में राष्ट्र चेतना और मानव सेवा के संकल्प को दोहराया गया।

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि हरिद्वार भारत की सांस्कृतिक चेतना का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज को याद करते हुए कहा कि उनके विचार और जीवन दर्शन आज भी समाज को सही दिशा दिखा रहे हैं। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी राष्ट्र की रक्षा केवल उसकी सीमाओं को सुरक्षित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उस राष्ट्र की सांस्कृतिक जड़ों को बचाना और मजबूत करना भी उतना ही अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि यदि किसी देश की संस्कृति कमजोर होती है, तो वह राष्ट्र आंतरिक रूप से खोखला हो जाता है। उन्होंने आधुनिकता और संस्कारों के मेल पर जोर देते हुए युवाओं से अपील की कि वे तकनीकी ज्ञान के साथ अपनी जड़ों से भी जुड़े रहें ताकि एक सशक्त भारत का निर्माण हो सके।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवभूमि में आए सभी विशिष्ट अतिथियों का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज ने अध्यात्म को केवल गुफाओं और कंदराओं तक सीमित न रखकर उसे जनसेवा और राष्ट्र सेवा से जोड़ा। उनके द्वारा स्थापित भारत माता मंदिर आज करोड़ों भारतीयों के लिए राष्ट्र प्रेम का जीवंत प्रतीक बन चुका है। मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत की प्राचीन विरासत को वैश्विक स्तर पर सम्मान मिल रहा है। उत्तराखंड सरकार भी इसी विजन पर काम कर रही है जहाँ विकास और विरासत के बीच एक बेहतर संतुलन बनाया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज को सनातन परंपरा का एक सशक्त स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि महाराज के जीवन में करुणा, राष्ट्रभक्ति और मैत्री के भाव कूट-कूट कर भरे थे। योगी आदित्यनाथ ने भारत माता मंदिर के महत्व को समझाते हुए कहा कि यह पवित्र स्थान किसी विशेष जाति, धर्म या भाषा के लिए नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण भारत को एक सूत्र में पिरोने वाला राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि संतों का जीवन समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का कार्य करता है।

केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने संत समाज के प्रति अपनी गहरी आस्था प्रकट करते हुए कहा कि उन्हें संतों के सान्निध्य से हमेशा नई ऊर्जा और मार्गदर्शन मिलता रहा है। उन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर पर हरिद्वार आने को अपना सौभाग्य बताया। वहीं हरिद्वार के सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भारत माता मंदिर की ‘राष्ट्र मंदिर’ के रूप में की गई कल्पना को और अधिक विस्तार देने की बात कही। उन्होंने चारधाम यात्रा के दौरान निस्वार्थ सेवा देने वाले चिकित्सा कर्मियों की भी सराहना की।

उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण ने महाराज को राष्ट्र और मानव चेतना का अमर पथप्रदर्शक बताया। उन्होंने कहा कि उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों को सनातन मूल्यों की रक्षा के लिए प्रेरित करता रहेगा। समारोह के दौरान कार्ष्णि पीठाधीश्वर स्वामी गुरु शरणानंद जी महाराज, मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और विधायक प्रेमचंद अग्रवाल सहित अनेक प्रशासनिक अधिकारी और भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

तीन दिनों तक चले इस समारोह ने न केवल हरिद्वार बल्कि पूरे देश के आध्यात्मिक वातावरण को प्रभावित किया है। गुरुदेव की प्रतिमा का अनावरण उनकी विचारधारा को समाज में पुनः स्थापित करने का एक माध्यम बनेगा। समापन समारोह के दौरान समूचा भारत माता मंदिर परिसर ‘भारत माता की जय’ और ‘स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज अमर रहें’ के जयघोष से गुंजायमान रहा। अंत में सभी आगंतुकों ने महाराज के जीवन मूल्यों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया। यह आयोजन न केवल एक धार्मिक कार्यक्रम था, बल्कि इसने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और सामाजिक समरसता का एक मजबूत संदेश पूरे विश्व को दिया है।

 

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