Uttarakhand: तकनीक और पारदर्शिता से सशक्त हुई सामाजिक सुरक्षा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक क्लिक से भेजी करोड़ों की पेंशन – The Hill News

Uttarakhand: तकनीक और पारदर्शिता से सशक्त हुई सामाजिक सुरक्षा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक क्लिक से भेजी करोड़ों की पेंशन

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाने के अपने संकल्प को एक बार फिर दोहराया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सुशासन और तकनीक के समन्वय से सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी मिसाल कायम की है। मुख्यमंत्री आवास में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने समाज कल्याण विभाग की विभिन्न पेंशन योजनाओं की जनवरी 2026 की किस्त को डिजिटल माध्यम से जारी किया। इस ‘वन-क्लिक’ प्रणाली के माध्यम से प्रदेश के 9.47 लाख से अधिक लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे पेंशन राशि हस्तांतरित की गई। यह पूरी प्रक्रिया प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के तहत संपन्न हुई, जो सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और गति का एक सशक्त उदाहरण पेश करती है।

इस डिजिटल पहल के दौरान पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि पात्रता परीक्षण, सत्यापन और भुगतान की पूरी प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ तथा त्वरित बनाया जाए। मुख्यमंत्री का मानना है कि सरकारी योजनाओं की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह कितनी सहजता और ईमानदारी से जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुँच रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीक का उपयोग न केवल भ्रष्टाचार को रोकने में सहायक है, बल्कि इससे आम नागरिकों का सरकार और प्रशासन पर विश्वास भी मजबूत होता है।

आंकड़ों की दृष्टि से देखें तो जनवरी 2026 के लिए कुल 1 अरब 41 करोड़ 66 लाख 51 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि लाभार्थियों के खातों में भेजी गई है। इस धनराशि में नियमित मासिक पेंशन के साथ-साथ उन लाभार्थियों का एरियर भुगतान भी शामिल है, जिनकी राशि किसी कारणवश लंबित थी। इस योजना के दायरे में समाज के विभिन्न वर्गों को शामिल किया गया है, जिनमें वृद्ध, दिव्यांग, विधवा, परित्यक्ता और निराश्रित नागरिक मुख्य रूप से शामिल हैं। इसके अलावा राज्य की विशिष्ट पेंशन योजनाओं जैसे तीलू रौतेली और बौना पेंशन के पात्रों को भी समय पर सहायता राशि प्रदान की गई है।

पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले कुछ महीनों में पेंशन योजनाओं के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, केवल दो माह की अल्प अवधि (दिसंबर 2025 से फरवरी 2026) के भीतर ही 15,784 नए लाभार्थियों को इन योजनाओं से जोड़ा गया है। यह राज्य प्रशासन की सक्रियता को दर्शाता है कि वे नए पात्र लोगों की पहचान करने में जुटे हुए हैं। साथ ही पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विभाग ने गहन सत्यापन अभियान भी चलाया। इस अभियान के तहत 1,523 ऐसे नामों को पोर्टल से हटाया गया जो अब अपात्र हो चुके थे या जिनकी मृत्यु हो चुकी थी। अपात्रों को सूची से हटाना यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी खजाने का पैसा केवल और केवल वास्तविक लाभार्थियों तक ही पहुँचे।

उत्तराखंड सरकार द्वारा विकसित डिजिटल पेंशन पोर्टल ने पात्रता निर्धारण की प्रक्रिया को भी काफी सरल बना दिया है। राज्य में अब ‘स्वतः आयु-पात्रता पहचान’ प्रणाली लागू की गई है। इस तकनीक का लाभ यह हुआ है कि अप्रैल 2024 से जनवरी 2026 के बीच 428 ऐसे नागरिकों को वृद्धावस्था पेंशन की स्वीकृति मिल गई, जिन्होंने 60 वर्ष की आयु पूर्ण की थी। इन नागरिकों को पेंशन के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने या आवेदन के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ा, बल्कि पोर्टल ने स्वतः उनकी आयु की पहचान कर उन्हें लाभान्वित किया। मुख्यमंत्री ने इसे ‘गुड गवर्नेंस’ का एक उत्कृष्ट मॉडल बताया, जहाँ सरकार स्वयं नागरिक की आवश्यकताओं के प्रति सचेत रहती है।

संबोधन के दौरान पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पेंशन केवल एक आर्थिक सहायता मात्र नहीं है, बल्कि यह बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों के लिए एक सम्मानजनक जीवन जीने का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं बनाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उन योजनाओं का लाभ बिना किसी बिचौलिए या बाधा के सीधे लाभार्थी तक पहुँचे। डीबीटी प्रणाली ने इस मार्ग को आसान बना दिया है, जिससे अब किसी भी लाभार्थी को अपनी पेंशन के लिए ब्लॉक या तहसील कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते।

इस कार्यक्रम के दौरान समाज कल्याण विभाग के अपर सचिव संदीप तिवारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने विभाग को नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए और कहा कि पात्र नागरिकों का चयन और उनका भुगतान एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया होनी चाहिए। उन्होंने विश्वास दिलाया कि उत्तराखंड सरकार समाज के कमजोर, वृद्ध, किसान और निराश्रित वर्गों के कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करना जारी रखेगी। सुशासन और संवेदनशीलता पर आधारित यह मॉडल उत्तराखंड को एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है। अंत में उन्होंने कहा कि जब तकनीक के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुँचती है, तभी लोकतंत्र का वास्तविक उद्देश्य सफल होता है।

 

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