Uttarakhand: उत्तराखंड में सुशासन और पारदर्शिता की नई मिसाल बना जन जन की सरकार जन जन के द्वार अभियान – The Hill News

Uttarakhand: उत्तराखंड में सुशासन और पारदर्शिता की नई मिसाल बना जन जन की सरकार जन जन के द्वार अभियान

देहरादून। उत्तराखंड के विकास और प्रशासनिक सुधारों की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार एक क्रांतिकारी कदम उठा रही है। सरकार द्वारा संचालित ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम प्रदेश के कोने-कोने में सुशासन, पारदर्शिता और प्रभावी जनसुनवाई का सबसे सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। इस विशेष अभियान का मूल उद्देश्य शासन और प्रशासन को जनता के इतने करीब ले जाना है कि आम नागरिकों को अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। इस पहल के माध्यम से सरकार स्वयं जनता की चौखट तक पहुँच रही है और उनकी शिकायतों का मौके पर ही त्वरित समाधान सुनिश्चित कर रही है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो इस अभियान की सफलता और व्यापकता का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। 02 फरवरी 2026 तक प्रदेश के सभी 13 जनपदों में इस अभियान के अंतर्गत कुल 548 जनसेवा शिविरों (कैंपों) का सफल आयोजन किया जा चुका है। इन शिविरों की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि इनमें न केवल शिकायतों का पंजीकरण किया जा रहा है, बल्कि विभिन्न विभागों के अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर समस्याओं का निपटारा भी कर रहे हैं। इन शिविरों के माध्यम से आम जनता की भागीदारी और सरकार के प्रति उनके विश्वास में निरंतर वृद्धि देखने को मिल रही है, जो राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए एक शुभ संकेत है।

पंजीकरण के आंकड़े इस जनोन्मुखी पहल की लोकप्रियता की गवाही दे रहे हैं। इस अभियान के तहत अब तक कुल 4,33,581 नागरिकों ने अपना पंजीकरण कराया है। विशेष रूप से आज के दिन ही 5,398 लोगों ने अलग-अलग कैंपों में पहुँचकर अपना पंजीकरण कराया, जो यह दर्शाता है कि यह अभियान हर गुजरते दिन के साथ और अधिक प्रभावी होता जा रहा है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों का जुड़ाव इस बात का प्रमाण है कि पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरी उतर रही है और लोग इस मंच को अपनी समस्याओं के समाधान का सबसे भरोसेमंद जरिया मान रहे हैं।

जनता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों के समाधान की रफ्तार भी काफी सराहनीय है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल पंजीकरण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक शिकायत का तार्किक और संतोषजनक निस्तारण होना अनिवार्य है। इसी का परिणाम है कि अब तक कुल 42,594 शिकायतों का सफलतापूर्वक समाधान किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, 28,721 शिकायतें वर्तमान में प्रक्रियाधीन हैं, जिन पर संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी प्राथमिकता के आधार पर कार्य कर रहे हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि कोई भी शिकायत अनावश्यक रूप से लंबित न रहे और तय समय सीमा के भीतर पीड़ित व्यक्ति को राहत मिले।

पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देशों के बाद यह भी सुनिश्चित किया गया है कि इन कैंपों के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुँचाया जाए। आंकड़ों के अनुसार, अब तक 61,054 नागरिकों को सीधे तौर पर विभिन्न महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं से लाभान्वित किया गया है। इसके साथ ही, 2,37,950 अन्य लोगों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से सहायता प्रदान की गई है। यह अभियान विशेष रूप से उन दूरस्थ, ग्रामीण और दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों के निवासियों के लिए एक वरदान साबित हो रहा है, जिनके लिए जिला मुख्यालय या राजधानी तक पहुँचकर अपनी बात रखना एक बड़ी चुनौती थी। पहाड़ की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच सरकार का जनता के पास पहुँचना सुशासन की नई परिभाषा लिख रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अभियान के पीछे की अपनी सोच को साझा करते हुए कई बार स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार का ध्येय केवल नीतियां और योजनाएं बनाना मात्र नहीं है, बल्कि उन योजनाओं का वास्तविक लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचाना है। उनके अनुसार, ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान संवाद, समाधान और संतुष्टि के त्रिकोणीय आधार पर टिका हुआ है। जब शासन स्वयं जनता से संवाद करता है, तो समाधान की राह आसान हो जाती है और अंततः यही संतुष्टि सुशासन का आधार बनती है।

सुशासन की दिशा में उठाए गए इस कदम को प्रदेश की प्रशासनिक कार्यसंस्कृति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। पहले जहाँ फाइलों को एक टेबल से दूसरी टेबल तक पहुँचने में महीनों लग जाते थे, अब इस अभियान के कारण अधिकारी सीधे जनता के प्रति जवाबदेह हो रहे हैं। राज्य सरकार का संकल्प है कि भविष्य में इस अभियान को और अधिक व्यापक और प्रभावी बनाया जाए। इसके लिए समय-समय पर शिविरों के फीडबैक की समीक्षा की जा रही है और तकनीकी का उपयोग कर पूरी प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाया जा रहा है।

उत्तराखंड सरकार का यह प्रयास न केवल समस्याओं के निस्तारण तक सीमित है, बल्कि यह जनता को सशक्त बनाने की एक मुहिम भी है। जब लोगों को यह महसूस होता है कि उनकी सरकार उनके साथ खड़ी है, तो वे राज्य के विकास में अधिक सक्रियता से भाग लेते हैं। आने वाले समय में इस अभियान के माध्यम से उत्तराखंड को सेवा, संवेदनशीलता और सुशासन के एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में प्रदेश के सभी 13 जिलों में प्रशासन की सक्रियता यह सुनिश्चित कर रही है कि विकास की मुख्यधारा से कोई भी व्यक्ति अछूता न रहे। सुशासन की यह गौरवशाली यात्रा उत्तराखंड के स्वर्णिम भविष्य की नींव रख रही है।

 

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