देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड ने साहसिक पर्यटन और पर्वतारोहण के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी युग की शुरुआत की है। राज्य सरकार ने हिमालय की भव्यता को दुनिया के सामने और अधिक सुलभ बनाने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विशेष निर्देशों के बाद उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर गढ़वाल और कुमाऊं मंडल की कुल 83 प्रमुख पर्वत चोटियों को पर्वतारोहण अभियानों के लिए आधिकारिक तौर पर खोल दिया है। इस बड़े कदम का प्राथमिक लक्ष्य उत्तराखंड को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पर्वतारोहण गंतव्य के रूप में स्थापित करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य की साहसिक पहचान को मजबूत करना है।
इस नई पहल के तहत जिन 83 चोटियों को खोला गया है, उनकी ऊंचाई 5,700 मीटर से लेकर 7,756 मीटर के बीच है। इनमें हिमालय की कुछ सबसे चुनौतीपूर्ण और विश्व प्रसिद्ध चोटियां शामिल हैं, जो अब तक पर्वतारोहियों के लिए पूरी तरह सुलभ नहीं थीं। पर्वत प्रेमियों के बीच आकर्षण का केंद्र रहने वाली कामेट (7,756 मीटर), नंदा देवी ईस्ट, चौखंबा समूह, त्रिशूल समूह, शिवलिंग, सतोपंथ, चंगाबांग, पंचचूली और नीलकंठ जैसी चोटियां अब नए अभियानों का स्वागत करेंगी। ये शिखर न केवल अपनी तकनीकी कठिनाइयों और ऊंचाइयों के लिए जाने जाते हैं, बल्कि इनका प्राकृतिक सौंदर्य और हिमालयी भव्यता भी दुनिया भर के पर्वतारोहियों को आकर्षित करती है।
इस अवसर पर पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हिमालय उत्तराखंड की पहचान, शक्ति और समृद्ध विरासत का प्रतीक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 83 प्रमुख चोटियों को खोलना साहसिक पर्यटन को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक बड़ा और दूरगामी फैसला है। सरकार चाहती है कि देश का युवा पर्वतारोहण जैसे साहसिक कार्यों में सक्रिय रूप से भाग ले। इससे न केवल स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ संतुलित विकास का लक्ष्य भी हासिल किया जा सकेगा। पुष्कर सिंह धामी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार सुरक्षित और जिम्मेदार पर्वतारोहण को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस पहल के माध्यम से दूर-दराज के सीमावर्ती क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को नई शक्ति मिलेगी।
भारतीय पर्वतारोहियों के लिए यह निर्णय विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होने वाला है। राज्य सरकार ने इन अधिसूचित चोटियों पर जाने वाले स्वदेशी पर्वतारोहियों के लिए सभी प्रकार के अभियान शुल्कों को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। अब भारतीय नागरिकों को पीक फीस, कैंपिंग फीस या पर्यावरण शुल्क जैसे भारी-भरकम खर्चों का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। पूर्व में ये शुल्क भारतीय पर्वतारोहण संस्था (आईएमएफ) और वन विभाग द्वारा वसूले जाते थे, लेकिन अब इनका वहन राज्य सरकार स्वयं करेगी। इस रियायत से उन प्रतिभाशाली युवाओं को बड़ा अवसर मिलेगा जो केवल आर्थिक तंगी के कारण पर्वतारोहण के अपने जुनून को पूरा नहीं कर पा रहे थे।
विदेशी पर्वतारोहियों को आकर्षित करने के लिए भी नियमों में महत्वपूर्ण ढील दी गई है। राज्य सरकार ने विदेशी अभियानों पर लगने वाले अतिरिक्त राज्य स्तरीय शुल्क को पूरी तरह से हटा दिया है। अब विदेशी पर्वतारोहियों को केवल आईएमएफ द्वारा निर्धारित मानक शुल्क ही देना होगा। इस सरलीकरण से उत्तराखंड की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रियता बढ़ेगी और विदेशों से आने वाले पर्वतारोहण दलों की संख्या में भारी इजाफा होने की उम्मीद है। अनुमति की प्रक्रिया को पारदर्शी और त्वरित बनाने के लिए ‘उत्तराखंड माउंटेनियरिंग परमिशन सिस्टम’ (यूकेएमपीएस) नामक एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया गया है, जिससे सभी आवेदन डिजिटल माध्यम से बिना किसी देरी के पूरे किए जा सकेंगे।
इस साहसिक पहल का सबसे गहरा सकारात्मक प्रभाव स्थानीय अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन पर पड़ेगा। सीमावर्ती गांवों में पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने से गाइड, पोर्टर, होमस्टे संचालक और परिवहन सेवाओं से जुड़े लोगों को सीधा रोजगार मिलेगा। यह कदम पहाड़ से हो रहे पलायन को रोकने में भी एक बड़ी भूमिका निभाएगा। स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में सम्मानजनक रोजगार मिलने से ग्रामीण ढांचा मजबूत होगा। हालांकि, सरकार ने सुरक्षा और पर्यावरण के प्रति अपनी संवेदनशीलता भी स्पष्ट की है। पर्वतारोहियों के लिए ‘लीव नो ट्रेस’ (निशान न छोड़ें) के सिद्धांत का पालन करना अनिवार्य होगा ताकि हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी को कोई नुकसान न पहुँचे।
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार ने भी पहाड़ी राज्यों में पर्यटन विकास पर विशेष ध्यान दिया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026-27 में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में पर्यावरण-अनुकूल ‘माउंटेन ट्रेल्स’ विकसित करने की बड़ी घोषणा की है। बजट का यह प्रावधान भारत को ट्रेकिंग और हाइकिंग के मामले में वैश्विक मानचित्र पर शीर्ष पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। उत्तराखंड सरकार की वर्तमान नीति और केंद्र के बजट सहयोग के समन्वय से यह निश्चित है कि आने वाले समय में देवभूमि के ये ऊंचे शिखर न केवल साहस की नई कहानियां लिखेंगे, बल्कि राज्य की आर्थिक समृद्धि का मुख्य आधार भी बनेंगे। उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने इन शानदार शिखरों पर दुनिया भर के साहसी पर्वतारोहियों का स्वागत करने की पूरी तैयारी कर ली है।
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