देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की कानून व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यशैली और जनसेवा को लेकर अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में किसी भी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुलिस और प्रशासन का हर विभाग आम जनता के प्रति संवेदनशील और जवाबदेह बने। पुष्कर सिंह धामी ने दो टूक शब्दों में कहा कि सरकारी योजनाएं केवल कागजों और फाइलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनका असर धरातल पर दिखना अनिवार्य है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में अखिल भारतीय डीजी/आईजी सम्मेलन से निकले निष्कर्षों पर चर्चा की गई। पुष्कर सिंह धामी ने कानून व्यवस्था की समीक्षा करते हुए पुलिस के ‘वर्क कल्चर’ में तत्काल सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि थानों और चौकियों में आने वाले आम आदमी के साथ मानवीय और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि यदि किसी निर्दोष नागरिक को बेवजह परेशान किया गया, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, अपराधियों में खौफ पैदा करने के लिए पुलिस को रात्रि गश्त और पेट्रोलिंग बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने आपराधिक मामलों की विवेचना को बिना किसी ठोस कारण के लंबित न रखने की हिदायत भी दी।
उत्तराखंड की भौगोलिक और सामरिक स्थिति को देखते हुए पर्यटन प्रबंधन पर भी विस्तृत चर्चा हुई। पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद राज्य में पर्यटकों की आमद में भारी उछाल आने की संभावना है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार अभी से अलर्ट मोड पर है। उन्होंने अधिकारियों को ट्रैफिक प्लान, पार्किंग सुविधाओं और यात्रियों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम करने को कहा है ताकि किसी भी पर्यटक को असुविधा न हो। इसी क्रम में उन्होंने एक बड़ी जानकारी साझा की कि कैंची धाम बाईपास का निर्माण कार्य जून माह तक पूरा कर लिया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को यातायात जाम से बड़ी राहत मिलेगी।
राज्य में बढ़ते भूमि विवादों और अवैध कब्जों पर पुष्कर सिंह धामी ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने लैंड फ्रॉड यानी भूमि धोखाधड़ी को रोकने के लिए एक अत्यंत सख्त कानून बनाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी भूमि और नदी-नालों के आसपास होने वाले अवैध निर्माणों को किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। इस संबंध में उन्होंने जवाबदेही तय करते हुए कहा कि अवैध अतिक्रमण के लिए उस क्षेत्र के एसडीएम, लेखपाल और पटवारी सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे। यदि किसी अधिकारी द्वारा अतिक्रमण को संरक्षण देने की बात सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर बात करते हुए पुष्कर सिंह धामी ने नशा मुक्ति को एक ‘जन आंदोलन’ बनाने का आह्वान किया। उन्होंने निर्देश दिए कि हर जिले से नशा मुक्ति अभियान की मासिक रिपोर्ट सीधे शासन को भेजी जाए, जिसकी निगरानी गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक स्वयं करेंगे। इसके अलावा, राज्य की अभियोजन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उन्होंने अभियोजन अधिकारियों के ‘परफॉर्मेंस ऑडिट’ कराने का आदेश दिया है। उनका मानना है कि जब तक अभियोजन पक्ष मजबूत नहीं होगा, तब तक अपराधियों को सजा दिलाना कठिन होगा। कारागार विभाग को भी निर्देशित किया गया है कि वे बंदियों के पुनर्वास और कौशल विकास पर विशेष ध्यान दें।
प्रशासनिक पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए पुष्कर सिंह धामी ने ‘जीरो पेंडेंसी’ का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने 1905 हेल्पलाइन की नियमित समीक्षा करने और मुख्यमंत्री घोषणाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे अगले छह महीनों के भीतर एक विशेष अभियान चलाकर राज्य के गांवों को सभी सरकारी योजनाओं से संतृप्त करें। डिजिटल गवर्नेंस को लेकर उन्होंने कहा कि इसे केवल एक औपचारिकता न मानकर पूरी गंभीरता से लागू किया जाए ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम लग सके और जनता के काम तेजी से हों।
आगामी चारधाम यात्रा और बुनियादी ढांचे के विकास पर भी बैठक में मंथन किया गया। पुष्कर सिंह धामी ने लोक निर्माण विभाग को निर्देशित किया कि सड़कों के डामरीकरण का कार्य 15 फरवरी तक अनिवार्य रूप से शुरू कर दिया जाए। उन्होंने साफ किया कि विकास कार्यों की गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। मुख्यमंत्री की इस मैराथन बैठक और कड़े तेवरों से यह स्पष्ट है कि उत्तराखंड सरकार आने वाले समय में शासन और प्रशासन के स्वरूप को पूरी तरह बदलने और जनता के प्रति अपनी जवाबदेही को और अधिक मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। उन्होंने सभी अधिकारियों को एकजुट होकर परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण के साथ काम करने का संकल्प दिलाया।
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