देहरादून। उत्तराखंड में संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार को व्यापक बनाने के लिए आदर्श संस्कृत ग्रामों को प्रमुख पर्यटन और तीर्थ स्थलों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही संस्कृत सीखने के लिए डिजिटल माध्यमों, मोबाइल ऐप, सोशल मीडिया और इंटरैक्टिव ऑनलाइन पाठ्यक्रमों का उपयोग बढ़ाया जाएगा। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने गुरुवार को उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम् के शासी निकाय की तीसरी बैठक की अध्यक्षता करते हुए इन पहलों को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
बैठक में संस्थान की ओर से किए जा रहे कार्यों, वार्षिक कार्ययोजना, बजट और संस्कृत भाषा के व्यापक प्रचार-प्रसार से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने संस्कृत से संबंधित गतिविधियों और प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों की बढ़ती संख्या पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि संस्कृत को अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी जरूरी है।
पर्यटन और तीर्थाटन से जुड़ेंगे संस्कृत ग्राम
मुख्य सचिव ने आदर्श संस्कृत ग्रामों को प्रमुख पर्यटन स्थलों, तीर्थस्थलों और पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को उत्तराखंड की संस्कृत परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।
इस पहल के माध्यम से संस्कृत ग्रामों को केवल भाषा के अध्ययन तक सीमित रखने के बजाय सांस्कृतिक अनुभव के केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर काम किया जा सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर संस्कृत से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है।
ऑनलाइन पाठ्यक्रम और सोशल मीडिया का होगा इस्तेमाल
बैठक में संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए आधुनिक डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग पर चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने संस्थान की वेबसाइट पर इंटरैक्टिव ऑनलाइन मॉड्यूल तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि लोग सरल तरीके से संस्कृत सीख सकें। उन्होंने भाषा से जुड़ी छोटी और जानकारीपूर्ण वीडियो रील्स बनाने तथा मोबाइल ऐप और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से अधिक लोगों तक पहुंचने की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि संस्कृत की उपयोगिता को समझाने के लिए विभिन्न गतिविधियों का विस्तार किया जाना चाहिए। इनमें मंत्र चिकित्सा से संबंधित कार्यक्रम, वैदिक गणित, वेद अध्ययन केंद्र और विभिन्न विषयों पर संगोष्ठियां शामिल हैं। इन माध्यमों से विद्यार्थियों और आम लोगों को संस्कृत के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा।
समर कैंप और स्कूल भ्रमण पर भी जोर
मुख्य सचिव ने संस्कृत सीखने के लिए सरल आदर्श संस्कृत ग्राम मॉडल और शिक्षकों के कौशल विकास का मॉडल तैयार करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में ग्रीष्मकालीन शिविरों को नियमित गतिविधि के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए भ्रमण कार्यक्रम और समर कैंप आयोजित किए जा सकते हैं। इससे बच्चों को संस्कृत सीखने के साथ राज्य की सांस्कृतिक परंपराओं को समझने का अवसर मिलेगा। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से पहाड़ी क्षेत्रों में संस्कृत का प्रसार बढ़ाने और संस्थान की गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम किया जा सकेगा।
बैठक में संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार, अपर सचिव नवनीत पांडेय, शासी निकाय के सदस्य और संस्थान के अधिकारी उपस्थित रहे।