हरिद्वार। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सशक्त पंचायतें विकसित उत्तराखंड की मजबूत नींव हैं। गांवों का विकास तभी प्रभावी होगा, जब पंचायत प्रतिनिधि स्थानीय जरूरतों को समझकर योजनाएं तैयार करें और उनके क्रियान्वयन में पारदर्शिता, गुणवत्ता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को हरिद्वार में त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों के लिए आयोजित एक दिवसीय अभिमुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में यह बात कही। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी विकासखंडों में 60 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को क्षमता विकास प्रशिक्षण से जोड़ा गया है।
मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों को लोकतंत्र की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए कहा कि वे सरकार और जनता के बीच सेतु का काम करते हैं। स्थानीय समस्याओं की जानकारी होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने में उनकी भूमिका अहम है। उन्होंने प्रतिनिधियों से ‘मेरा गांव-मेरी जिम्मेदारी’ की भावना के साथ काम करने और प्रत्येक पात्र व्यक्ति को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का आह्वान किया।
जनभागीदारी से बनें पंचायत विकास योजनाएं
धामी ने कहा कि 2 अक्टूबर 2026 से शुरू जन योजना अभियान के तहत ग्राम, क्षेत्र और जिला पंचायत स्तर पर विकास योजनाएं तैयार की जा रही हैं। इन योजनाओं में स्थानीय जरूरतों, उपलब्ध संसाधनों और ग्रामीणों के सुझावों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। प्रत्येक पंचायत को अपने लक्ष्य, कार्य पूरा करने की समयसीमा और अपेक्षित परिणाम तय करने चाहिए, ताकि विकास कार्यों का लाभ लोगों तक पहुंच सके।
उन्होंने कहा कि पेयजल, सड़क, स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को पंचायतों की विकास योजनाओं में प्रमुखता दी जाए। ग्राम सभाओं में ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करने के साथ योजनाओं की नियमित समीक्षा भी की जानी चाहिए। कमजोर और वंचित वर्गों की जरूरतों पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
पंचायत भवनों और डिजिटल व्यवस्था का विस्तार
मुख्यमंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 56 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया गया। राज्य की 7,817 ग्राम पंचायतों में से 5,972 में पंचायत भवन ग्राम सचिवालय के रूप में संचालित हो रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में 1,362 पंचायत भवनों का निर्माण किया गया और 584 भवनों की मरम्मत कराई गई। इसके अलावा, एक हजार से अधिक ग्राम पंचायतों का कम्प्यूटरीकरण किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के माध्यम से पंचायतों की कार्ययोजनाओं, वित्तीय एवं भौतिक प्रगति और विकास कार्यों की जियो टैगिंग की जा रही है। डिजिटल व्यवस्था से पंचायतों के कामकाज को सरल और पारदर्शी बनाने में मदद मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायतों में खर्च होने वाला धन जनता का है, इसलिए उसके उपयोग का पूरा हिसाब जनता के सामने होना चाहिए। उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और योजनाओं की उपयोगिता को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
स्वच्छता और ग्रामीण रोजगार पर ध्यान
धामी ने कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ गांव बनाने में पंचायतों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ग्रामीण सड़कों और स्थानीय बाजारों में सफाई व्यवस्था मजबूत करने के लिए जिला पंचायतों को कचरा उठाने वाली मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। विकासखंड स्तर पर भी इस दिशा में व्यवस्थाएं की गई हैं। उन्होंने स्वच्छता अभियान को जनभागीदारी से जोड़ने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों, महिला उद्यमिता, कृषि, बागवानी, स्थानीय उत्पादों और पर्यटन को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। गांवों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना तथा पलायन कम करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण सहित उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। साथ ही, गांवों की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने की जरूरत बताई।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि सड़क, बिजली, विद्यालय और पंचायत भवन जैसी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने में पंचायतों की अहम भूमिका है। उन्होंने प्रतिनिधियों से सरकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और अंतिम व्यक्ति तक उनका लाभ पहुंचाने की अपील की।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, विधायक आदेश चौहान, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, राज्य मंत्री देशराज कर्णवाल और आदेश सैनी सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, ग्राम प्रधान तथा प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
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