वाशिंगटन। अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति और वीजा व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट पर अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी के बीच विदेशी कामगारों को नियुक्त करने का आरोप लगाया है। इसी बीच, अमेरिकी सरकार ने स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम यानी PERM से जुड़ी प्रक्रिया में आठ कंपनियों को निलंबित करने की जानकारी दी है। इनमें माइक्रोसॉफ्ट, एडोब और कैपजेमिनी समेत पांच भारतीय आईटी कंपनियों के नाम शामिल बताए गए हैं।
वीजा धोखाधड़ी से निपटने के मुद्दे पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वेंस ने कहा कि अमेरिकी कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों पर निर्भरता बढ़ाने के बजाय योग्य अमेरिकी नागरिकों को रोजगार देने को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि माइक्रोसॉफ्ट ने H-1B वीजा और PERM व्यवस्था का अनुचित लाभ उठाया है।
छंटनी और वीजा के आंकड़ों पर उठाए सवाल
वेंस के मुताबिक, माइक्रोसॉफ्ट ने पिछले साल करीब 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की, जबकि कंपनी को लगभग 6,300 H-1B वीजा और करीब 3,000 ग्रीन कार्ड से संबंधित लाभ मिले। इन आंकड़ों के आधार पर उन्होंने कंपनी की भर्ती नीति पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि अमेरिकी कर्मचारियों को हटाकर विदेशी कामगारों को अवसर दिए जा रहे हैं।
वेंस ने कहा कि अमेरिकी सरकार तकनीकी क्षेत्र में निवेश और कंपनियों के विस्तार को प्रोत्साहित करना चाहती है, लेकिन इसका लाभ अमेरिकी कर्मचारियों को भी मिलना चाहिए। उन्होंने कंपनियों से ऐसी नीतियां अपनाने की अपील की, जिनसे देश के नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ें।
H-1B कर्मचारियों के वेतन पर भी टिप्पणी
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने H-1B वीजा पर काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन को लेकर भी दावा किया। उन्होंने कहा कि कुछ H-1B कर्मचारी समान पदों पर काम करने वाले अमेरिकी नागरिकों की तुलना में सालाना करीब 20,000 डॉलर कम कमाते हैं। आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों के मामले में उन्होंने यह अंतर लगभग 48,000 डॉलर बताया।
वेंस ने आरोप लगाया कि कुछ कंपनियां विदेशी कर्मचारियों की निर्भरता का फायदा उठाकर लागत कम करती हैं और अमेरिकी कर्मचारियों की मजदूरी पर दबाव डालती हैं।
माइक्रोसॉफ्ट ने आरोपों को किया खारिज
माइक्रोसॉफ्ट ने इन आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पिछले वित्त वर्ष में जमा किए गए उसके लगभग 6,000 H-1B आवेदनों में से 80 प्रतिशत मौजूदा कर्मचारियों के वीजा की अवधि बढ़ाने या उनकी स्थिति में बदलाव से जुड़े थे। कंपनी के अनुसार, इन आवेदनों को नए कर्मचारियों की भर्ती के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
कंपनी ने यह भी कहा कि वह तकनीकी क्षेत्र में कर्मचारियों को प्रतिस्पर्धी वेतन देने वाली कंपनियों में शामिल है। माइक्रोसॉफ्ट का दावा है कि उसके H-1B कर्मचारियों को समान प्रकार का काम करने वाले अन्य कर्मचारियों के अनुरूप वेतन दिया जाता है।
आठ कंपनियों के PERM कार्यक्रम पर कार्रवाई
खबर में दी गई जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सरकार ने PERM कार्यक्रम से जुड़ी प्रक्रिया में आठ कंपनियों को निलंबित किया है। सूची में तीन अमेरिकी कंपनियां—माइक्रोसॉफ्ट, एडोब और कैपजेमिनी—तथा पांच भारतीय आईटी कंपनियां—कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो और HCL—शामिल हैं।
PERM यानी स्थायी श्रम प्रमाणन प्रक्रिया अमेरिकी नियोक्ताओं को कुछ शर्तों के तहत विदेशी कर्मचारियों के लिए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में मदद करती है। इस प्रक्रिया पर रोक या निलंबन का असर संबंधित कंपनियों के उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जो अमेरिका में स्थायी निवास पाने की प्रक्रिया में हैं।
हालांकि, निलंबन के दायरे, अवधि और प्रत्येक कंपनी पर लागू शर्तों का विस्तृत विवरण उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है। इसलिए प्रभावित कर्मचारियों पर वास्तविक असर का आकलन आधिकारिक आदेशों और संबंधित कंपनियों की स्थिति के आधार पर ही किया जा सकेगा।
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