वाशिंगटन। टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क ने भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक की शुरुआत में हो रही देरी को लेकर गंभीर आरोप लगाया है। मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जवाब में दावा किया कि भारत में कुछ प्रभावशाली उद्योगपति अपने हित और एकाधिकार को बनाए रखने के लिए स्टारलिंक के भारत में प्रवेश में बाधा डाल रहे हैं। उन्होंने इसे भारतीय लोगों के हितों के खिलाफ बताया।
मस्क ने कहा कि कुछ खास लोग भारतीय जनता के बीच अपना एकाधिकार कायम रखना चाहते हैं और इसी वजह से उनकी कंपनी को भारत में आगे बढ़ने से रोका जा रहा है। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में किसी उद्योगपति या कंपनी का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया। मस्क ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि लोग खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि वे लोग कौन हो सकते हैं।
दूरदराज के इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाने का दावा
स्टारलिंक लंबे समय से भारत के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में सैटेलाइट के जरिए हाई-स्पीड इंटरनेट उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है। मस्क के मुताबिक, कंपनी उन गांवों और लोगों तक इंटरनेट पहुंचाना चाहती है जहां अभी तक पारंपरिक ब्रॉडबैंड सेवाएं नहीं पहुंच सकी हैं या मौजूदा इंटरनेट सेवाओं की कीमत आम लोगों के लिए अधिक है।
कंपनी का कहना है कि भारत में सेवा शुरू करने के लिए उसकी तैयारियां काफी हद तक पूरी हो चुकी हैं। स्टारलिंक के अनुसार, जैसे ही भारत सरकार की ओर से आवश्यक मंजूरी मिलेगी, वह अपनी सेवा शुरू करने की स्थिति में होगी।
20 गेटवे साइट्स तैयार
इंडिया मोबाइल कांग्रेस के दौरान स्टारलिंक की बिजनेस ऑपरेशंस से जुड़ी अधिकारी लॉरेन ड्रायर ने कंपनी की तैयारियों की जानकारी दी थी। उनके अनुसार, स्टारलिंक ने भारत में करीब 20 गेटवे साइट्स तैयार कर ली हैं। इसके साथ ही भारतीय यूजर्स से जुड़े डेटा को देश के भीतर सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था तैयार किए जाने का भी दावा किया गया है।
स्टारलिंक के लाइसेंस और बुनियादी ढांचे को लेकर तैयारियों के बीच भारतीय सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा को लेकर भी चर्चा तेज है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सुनील भारती मित्तल समर्थित यूटेलसैट वनवेब और मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं। बाजार में यह चर्चा है कि स्पेक्ट्रम आवंटन के मामले में इन कंपनियों को प्राथमिकता मिल सकती है।
स्पेक्ट्रम आवंटन के नियम क्या हैं
सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर दूरसंचार नियामक की सिफारिशों में व्यवस्था तय की गई है। इसके तहत सैटेलाइट सेवा प्रदाताओं को पांच साल की अवधि के लिए स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराया जाना प्रस्तावित है। इसके बदले कंपनियों को अपने एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू यानी एजीआर का पांच प्रतिशत स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज के रूप में देना होगा।
दूरसंचार व्यवस्था में ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए इस शुल्क को कम किए जाने की संभावना का भी उल्लेख किया गया है। ऐसे में भारत में स्टारलिंक की एंट्री को लेकर मस्क के आरोपों के बीच अब नियामकीय मंजूरियों और स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया पर भी नजर बनी हुई है।
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