Mumbai: सेंसेक्स 900 अंक से ज्यादा टूटा निफ्टी भी 1.4 फीसदी नीचे बाजार में बिकवाली का दबाव – The Hill News

Mumbai: सेंसेक्स 900 अंक से ज्यादा टूटा निफ्टी भी 1.4 फीसदी नीचे बाजार में बिकवाली का दबाव

नई दिल्ली। वैश्विक शेयर बाजारों में कमजोरी और बॉन्ड यील्ड में लगातार बढ़ोतरी का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। घरेलू इक्विटी मार्केट लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में दबाव में रहा। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी 50 गुरुवार को शुरुआती कारोबार में लगभग सपाट और मिले-जुले रुख के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर में बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख सूचकांक तेजी से नीचे चले गए।

निवेशक भारतीय रिजर्व बैंक की हालिया मौद्रिक नीति के असर का आकलन कर रहे हैं। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेत और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड में बदलाव के कारण निवेशकों के बीच सतर्कता बनी हुई है।

सेंसेक्स 909 अंक तक टूटा

दोपहर करीब एक बजे सेंसेक्स 909.45 अंक यानी 1.25 प्रतिशत की गिरावट के साथ 71,729.26 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। कारोबार के दौरान सेंसेक्स में लगातार दबाव देखने को मिला।

दूसरी ओर, निफ्टी 50 भी कमजोर रहा। सूचकांक कारोबार के दौरान 22,254.30 के स्तर तक फिसल गया। दोपहर एक बजे निफ्टी 323.10 अंक यानी 1.43 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,279.95 के स्तर पर था।

शुरुआती कारोबार में कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में मजबूती दिखाई दी थी, लेकिन व्यापक बाजार में बिकवाली बढ़ने के साथ यह तेजी टिक नहीं सकी।

कई सेक्टरों में जोरदार गिरावट

सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो बाजार में व्यापक स्तर पर कमजोरी दिखाई दी। निफ्टी ऑटो में 1.78 प्रतिशत, एफएमसीजी में 1.81 प्रतिशत और मीडिया इंडेक्स में 1.71 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

मेटल सेक्टर सबसे अधिक दबाव में नजर आया और इसमें 3.23 प्रतिशत की गिरावट रही। फार्मा में 2.13 प्रतिशत, रियल्टी में 2.39 प्रतिशत, हेल्थकेयर में 2.21 प्रतिशत और तेल एवं गैस क्षेत्र में 2.60 प्रतिशत की कमजोरी देखी गई। निफ्टी 500 हेल्थकेयर इंडेक्स भी 2.29 प्रतिशत नीचे रहा।

हालांकि, कारोबार की शुरुआत में मेटल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और केमिकल्स से जुड़े कुछ शेयरों में हल्की मजबूती देखने को मिली थी।

आरबीआई की नीति और बढ़ी ब्याज दरों का असर

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक के मौद्रिक नीति रुख और रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी के बाद इक्विटी बाजार के वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ा है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी की स्थिति में निश्चित आय वाले निवेश विकल्प निवेशकों को पहले की तुलना में अधिक आकर्षक लग सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दरों में बदलाव का असर अलग-अलग क्षेत्रों पर अलग तरह से पड़ता है। ऐसे माहौल में निवेशक अपेक्षाकृत कम ब्याज संवेदनशील क्षेत्रों की ओर रुख कर सकते हैं।

एफआईआई की बिकवाली बनी चिंता

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली भी घरेलू बाजार के लिए चुनौती बनी हुई है। बाजार जानकारों के अनुसार, अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड के 5.3 प्रतिशत से ऊपर बने रहने से भारतीय शेयर बाजार में खासकर बड़े शेयरों पर दबाव कायम रह सकता है।

हालांकि, ऊंचे वैल्यूएशन के बावजूद ग्रोथ आधारित शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। इसके मुकाबले वैल्यू शेयरों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा है। वैश्विक बॉन्ड यील्ड, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और आरबीआई की मौद्रिक नीति के प्रभाव पर अब बाजार की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले कारोबारी सत्रों में इन्हीं संकेतों से बाजार की दिशा प्रभावित हो सकती है।

डिस्क्लेमर: यह खबर शेयर बाजार से जुड़ी जानकारी के उद्देश्य से है, निवेश की सलाह नहीं। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले प्रमाणित निवेश सलाहकार से सलाह लेना उचित है।

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