नई दिल्ली।
नीट-यूजी परीक्षा धांधली और पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले हजारों छात्रों और नागरिकों के लिए देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ी राहत की खबर आई है। सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए नीट प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दर्ज की गई सभी प्राथमिकियों (एफआईआर) को रद कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में छात्रों व अन्य प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध दर्ज किए गए ऐसे सभी मामले अब निष्प्रभावी माने जाएंगे। हालांकि, न्यायालय ने यह भी साफ किया है कि जिन आरोपियों की पृष्ठभूमि गंभीर आपराधिक रही है, उन्हें इस राहत के दायरे में शामिल नहीं किया जाएगा।
सर्वोच्च न्यायालय का यह महत्वपूर्ण निर्णय केंद्र सरकार द्वारा दिए गए उस आश्वासन के बाद आया है, जिसमें सरकार ने प्रदर्शनकारियों के प्रति नरम रुख अपनाने की बात कही थी। सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया था कि 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में दर्ज किए गए मामलों को वापस ले लिया जाएगा। इसके साथ ही सरकार ने यह भी वचन दिया कि भविष्य में इस विशेष विरोध प्रदर्शन को आधार बनाकर किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा। सरकार के इस सकारात्मक रवैये ने अदालत को छात्रों के हक में फैसला लेने के लिए प्रेरित किया।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को जानकारी दी कि केवल केंद्र ही नहीं, बल्कि दिल्ली पुलिस सहित बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और महाराष्ट्र की राज्य सरकारों ने भी छात्रों पर दर्ज एफआईआर रद करने की मांग वाली याचिकाओं का समर्थन किया है। सुनवाई के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब अदालत ने सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच आपसी विश्वास और सकारात्मक संवाद की सराहना की। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने टिप्पणी करते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने बहुत ही गरिमापूर्ण रुख अपनाया है और सरकार छात्रों को अपना दुश्मन नहीं मानती है।
अदालत के इस फैसले के बाद प्रदर्शनकारी समूहों के बीच खुशी की लहर है। प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे संगठन ‘सीजेपी’ (CJP) ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित अपने बड़े मार्च को वापस लेने का ऐलान कर दिया है। संगठन के प्रवक्ता सौरभ दास ने बताया कि केंद्र सरकार के आश्वासन और न्यायालय के न्यायपूर्ण निर्णय के बाद अब विरोध प्रदर्शन को जारी रखने की आवश्यकता नहीं रह गई है। उन्होंने अदालत और दोनों पक्षों के वकीलों का आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि आदेश का क्रियान्वयन बिना किसी देरी के जमीनी स्तर पर होगा।
अदालत ने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए दिल्ली पुलिस को केवल उन मुट्ठी भर लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने की अनुमति दी है, जिनका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। 2,873 लोगों में से केवल गंभीर अपराधियों को छोड़कर बाकी सभी को क्लीन चिट दे दी गई है।
इस कानूनी राहत के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट ने उन परिवारों के प्रति भी संवेदनशीलता दिखाई है जिन्होंने नीट-यूजी 2026 परीक्षा के विवाद और पेपर लीक के कारण अपने बच्चों को खो दिया है। पेपर लीक और परीक्षा रद होने के तनाव में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजे के मुद्दे पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार आर्थिक सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार ने इस प्रक्रिया और इसके तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने के लिए तीन महीने का समय मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए निर्देश दिया है कि अगले 90 दिनों के भीतर मुआवजे की पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली जाए ताकि पीड़ित परिवारों को कुछ आर्थिक संबल मिल सके। कोर्ट का यह फैसला न केवल छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि प्रभावित परिवारों के प्रति मानवीय संवेदनाओं को भी रेखांकित करता है।