तेहरान। मध्य पूर्व में जारी सैन्य संघर्ष अब एक बेहद खतरनाक और विस्फोटक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने शुक्रवार को लगातार सातवीं रात ईरान के विभिन्न सामरिक ठिकानों पर भीषण बमबारी की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने इन हमलों की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया है कि ये कार्रवाई सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। दूसरी ओर, अमेरिका की इस निरंतर सैन्य कार्रवाई ने ईरान के तेवरों को और अधिक उग्र कर दिया है। तेहरान ने अब वाशिंगटन को सीधी और खुली चेतावनी जारी की है कि यदि यह सिलसिला तुरंत नहीं थमा, तो आने वाले समय में क्षेत्र की कोई भी अंतरराष्ट्रीय या राजनीतिक सीमा सुरक्षित नहीं रहेगी।
यह सैन्य टकराव उस समय और अधिक गहरा गया जब तेहरान और वाशिंगटन के बीच पर्दे के पीछे चल रही शांति वार्ता पूरी तरह विफल होकर समाप्त हो गई। कूटनीतिक प्रयासों के धराशायी होने के बाद ईरान ने कतर, कुवैत और जॉर्डन जैसे उन अमेरिकी सहयोगियों को निशाना बनाते हुए अब तक के सबसे बड़े हमले किए थे, जहाँ अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। अमेरिकी सेना की ताजा बमबारी को ईरान के उन्हीं हमलों के करारे जवाब के रूप में देखा जा रहा है।
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी हवाई हमलों से दक्षिणी ईरान के तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही हुई है। विशेष रूप से सामरिक महत्व के तटीय शहर बंदर अब्बास को जोड़ने वाले कई प्रमुख पुल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इन पुलों के टूटने से न केवल नागरिक परिवहन बाधित हुआ है, बल्कि ईरानी सेना की रसद आपूर्ति और सैन्य गतिविधियों के लिए भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित एक महत्वपूर्ण ईरानी निगरानी टावर को भी अमेरिकी मिसाइलों ने मलबे में तब्दील कर दिया है।
ईरानी नेतृत्व इस क्षति से बेहद आक्रोशित है। ईरान के सर्वोच्च नेता के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अमेरिका ने आगामी सप्ताहांत तक अपनी गोलाबारी जारी रखी, तो तेहरान बड़े पैमाने पर आक्रामक अभियान फिर से शुरू करने के लिए मजबूर होगा। प्रतिशोध की इसी रणनीति के तहत तेहरान ने फारस की खाड़ी के उन प्रमुख बंदरगाहों को भी निशाना बनाने की धमकी दी है, जो वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के लिए जीवन रेखा माने जाते हैं।
ईरानी समाचार एजेंसी आईआरआईबी के मुताबिक, मेजर जनरल मोहसेन रेज़ाई ने युद्ध की नई दिशा का संकेत दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान अब केवल रक्षात्मक या सीमित जवाबी कार्रवाई तक खुद को सीमित नहीं रखेगा। उनके अनुसार, आने वाले दिनों में ईरान की सैन्य रणनीति “रूथलेस” (कठोर) हो सकती है और कोई भी राजनीतिक सीमा उनके हमलों से अछूती नहीं रहेगी। इसका सीधा अर्थ यह है कि संघर्ष अब ईरान और अमेरिका के बीच से निकलकर पूरे खाड़ी क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है, जिससे पड़ोसी देशों की सुरक्षा भी दांव पर लग गई है।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भारी चिंता है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले 48 से 72 घंटों के भीतर युद्धविराम या कूटनीतिक हस्तक्षेप नहीं होता है, तो यह तनाव एक पूर्ण और विनाशकारी क्षेत्रीय युद्ध में तब्दील हो सकता है।
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