देहरादून। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) में वीआईपी मेहमानों के आवास और भोजन बिलों के भुगतान से जुड़े एक विवादित मामले ने तूल पकड़ लिया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे इस प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और तथ्यों को जनता के सामने लाने के उद्देश्य से चार सदस्यीय एक उच्च स्तरीय विभागीय जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं।
हेमंत द्विवेदी ने कहा कि सोशल मीडिया पर जो वीआईपी आवास और भोजन बिल भुगतान संबंधी खबरें चल रही हैं, उनकी सत्यता का पता लगाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर समिति की प्राथमिकता श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धापूर्वक दिए गए दान की पवित्रता को बनाए रखना है। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि मंदिर के कोष या दान की राशि का किसी भी स्तर पर दुरुपयोग कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि जांच में कोई भी व्यक्ति या अधिकारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
इस प्रकरण की गहराई से जांच करने के लिए जो चार सदस्यीय समिति बनाई गई है, उसमें अनुभवी अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। गठित जांच समिति में वित्त नियंत्रक हेम कांडपाल, अधिशासी अभियंता विपिन तिवारी, विधि अधिकारी एसएस बर्त्वाल और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजन नैथानी शामिल हैं। इस समिति को निर्देश दिया गया है कि वह सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दस्तावेजों और बिलों की बारीकी से जांच करे और यह पता लगाए कि भुगतान की प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं। मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने इस समिति के गठन के औपचारिक आदेश भी जारी कर दिए हैं।
जांच समिति को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया गया है। इस समय सीमा के भीतर समिति को पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर अपनी रिपोर्ट अध्यक्ष को प्रस्तुत करनी होगी। हेमंत द्विवेदी ने विश्वास दिलाया कि मंदिर समिति पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जांच की रिपोर्ट आने के बाद सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाएगा ताकि श्रद्धालुओं के मन में किसी प्रकार का संशय न रहे।
यह कदम मंदिर समिति की छवि को बनाए रखने और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर कुछ बिलों के स्क्रीनशॉट साझा किए जा रहे थे, जिनमें वीआईपी मेहमानों पर भारी-भरकम खर्च किए जाने के दावे किए गए थे। इन दावों के बाद से ही मंदिर प्रबंधन पर सवाल उठने लगे थे, जिसके बाद अब विभागीय जांच के जरिए दूध का दूध और पानी का पानी करने की तैयारी की गई है। समिति इस बात की भी पड़ताल करेगी कि क्या ये बिल वास्तविक हैं या इन्हें किसी खास उद्देश्य से प्रसारित किया गया है। वर्तमान में चारधाम यात्रा अपने चरम पर है, ऐसे में मंदिर समिति किसी भी विवाद को जल्द से जल्द सुलझाकर अपनी साख को सुरक्षित रखना चाहती है।