शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों के पहले चरण में सामने आई गंभीर अनियमितताओं और प्रशासनिक चूक के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने कड़ा रुख अपना लिया है। आयोग ने प्रदेश के सभी जिला उपायुक्तों (डीसी) को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए निर्देश दिए हैं कि पहले चरण में हुई गलतियों की पुनरावृत्ति दूसरे चरण में किसी भी स्थिति में नहीं होनी चाहिए। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव सुरजीत सिंह राठौर ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों को औपचारिक पत्र भेजा है। आयोग ने पहले चरण के दौरान विभिन्न जिलों से प्राप्त शिकायतों का विस्तृत विवरण देते हुए ड्यूटी पर तैनात कर्मियों को अधिक सतर्कता और सावधानी के साथ कार्य करने की हिदायत दी है। सभी सेक्टर अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है कि मतदान केंद्रों पर नियमों का अक्षरशः पालन हो।
आगामी गुरुवार को होने वाले दूसरे चरण के चुनाव में प्रदेश की 1227 पंचायतों में मतदान होगा। वोटिंग की प्रक्रिया सुबह 7 बजे से प्रारंभ होकर दोपहर 3 बजे तक चलेगी। सुरक्षा की दृष्टि से आयोग ने संवेदनशील और अति संवेदनशील मतदान केंद्रों की पहचान कर ली है, जहां पूरी चुनावी प्रक्रिया की अनिवार्य रूप से वीडियो रिकॉर्डिंग करवाई जाएगी। मतदान को शांतिपूर्ण और पारदर्शी बनाने के लिए भारी पुलिस बल और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है।
पहले चरण में हुई गड़बड़ियों का जिक्र करें तो शिमला जिले की नरैन पंचायत के वार्ड एक (ब्रांदली) में ‘नोटा’ मुहर के गलत प्रयोग के कारण चुनाव रद्द करना पड़ा, जहां अब 30 मई को मतदान होगा। सिरमौर के कालाअंब में फर्जी मतदान की शिकायत मिली थी, जबकि सोलन के पट्टा विकास खंड में हिंसा की घटना सामने आई। वहीं करसोग में एक प्रत्याशी का नाम बैलेट पेपर से गायब होने जैसे गंभीर मामले ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए थे। इन्हीं घटनाओं से सबक लेते हुए आयोग ने इस बार सुरक्षा चक्र को और मजबूत किया है।
मतदान के तुरंत बाद वार्ड पंच, प्रधान और उप-प्रधान पद के लिए मतों की गिनती संबंधित पंचायत मुख्यालयों पर ही शुरू कर दी जाएगी। मतगणना के समय भी पारदर्शिता के लिए वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था रहेगी। हालांकि, जिला परिषद और पंचायत समिति के सदस्यों की मतपेटियों को कड़ी सुरक्षा में ब्लॉक विकास कार्यालयों (बीडीओ) में जमा किया जाएगा, जिनकी गिनती 31 मई को होगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि दोपहर 3 बजे तक जो भी मतदाता कतार में खड़े होंगे, उन्हें मतदान का पूरा अवसर दिया जाएगा।
मतदान केंद्रों की मर्यादा बनाए रखने के लिए नए प्रतिबंध भी लागू किए गए हैं। बूथ के भीतर केवल अधिकृत चुनाव कर्मियों और मतदाताओं को ही प्रवेश मिलेगा। मतदाता अपने साथ मोबाइल फोन, बैग या कोई भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अंदर नहीं ले जा सकेंगे। इसके लिए केंद्रों के बाहर ही सामान जमा करने की व्यवस्था की गई है। साथ ही, राजनीतिक दलों के बूथ मतदान केंद्र की 100 मीटर की परिधि से बाहर ही लगाए जा सकेंगे। आयोग की इस मुस्तैदी का उद्देश्य राज्य में लोकतंत्र की इस बुनियादी इकाई के चुनावों को पूरी तरह निष्पक्ष और विवादरहित बनाना है।