शिमला। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार शाम शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में ‘सिटी लिमिट्स – द क्राइसिस ऑफ अर्बनाइजेशन’ नामक पुस्तक का विमोचन किया। इस पुस्तक का संपादन शिमला नगर निगम के पूर्व डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवार द्वारा किया गया है। इस अवसर पर आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने बढ़ते शहरीकरण से उत्पन्न चुनौतियों, पर्यावरण संरक्षण और राजधानी शिमला के भविष्य के विकास को लेकर अपने विचार साझा किए।
समारोह को संबोधित करते हुए सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रकृति ने हिमाचल प्रदेश को शुद्ध हवा और स्वच्छ पानी के रूप में अमूल्य संपत्ति दी है। इन संसाधनों का संरक्षण करना केवल सरकार का नहीं, बल्कि प्रदेश के हर नागरिक का सामूहिक उत्तरदायित्व है। शिमला के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की राजधानी और सबसे बड़ा शहर होने के कारण यहां पिछले कुछ दशकों में बहुत तेजी से बदलाव आए हैं। मुख्यमंत्री ने अपनी यादें साझा करते हुए कहा कि उन्होंने अपने बचपन से शिमला को बदलते देखा है। जिन क्षेत्रों में कभी घने जंगल हुआ करते थे, आज वहां कंक्रीट की इमारतें खड़ी हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि शहर के सीमित भूगोल को देखते हुए अब यहां ‘वर्टिकल’ यानी ऊर्ध्वाधर निर्माण की दिशा में सोचने की आवश्यकता है।
राजधानी को आधुनिक और सुंदर बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने सरकार की कई महत्वपूर्ण योजनाओं का विवरण दिया। उन्होंने बताया कि शहर में ऊपर से गुजरने वाले बिजली और अन्य तारों के जाल को हटाने के लिए 145 करोड़ रुपये की लागत से एक अंडरग्राउंड डक्ट सिस्टम बनाया जा रहा है, जिससे शहर की सुंदरता में निखार आएगा। वर्तमान सब्जी मंडी क्षेत्र को 600 करोड़ रुपये के निवेश से एक आधुनिक कॉम्प्लेक्स के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही लिफ्ट के पास एक अंडरपास बनाने का प्रस्ताव है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि शिमला शहर में 24 घंटे पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 800 करोड़ रुपये की एक वृहद योजना को धरातल पर उतारा जा रहा है। सर्कुलर रोड को चौड़ा करने के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य जारी है और शहर की प्राकृतिक सुंदरता बनाए रखने के लिए ग्रीन एरिया को बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
सतत विकास पर जोर देते हुए सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल ने पिछले तीन वर्षों में दो बड़ी प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है, जिससे राज्य को भारी नुकसान हुआ। उन्होंने बताया कि बादल फटने की घटनाओं का अब वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है, क्योंकि ये घटनाएं अब केवल ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि निचले इलाकों में भी होने लगी हैं। उन्होंने केंद्र सरकार के साथ हुई बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि भविष्य में इस तरह की प्राकृतिक आपदाएं उत्तराखंड और उत्तर-पूर्वी राज्यों में भी बढ़ सकती हैं। सरकार प्रदेश के विकास को पर्यावरण और संस्कृति के संतुलन के साथ आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कांगड़ा में एयरो सिटी और हिम-चंडीगढ़ व हिम-पंचकूला जैसी नई टाउनशिप विकसित करने की योजना के बारे में भी बताया।
कार्यक्रम में उपस्थित झारखंड हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस तरलोक सिंह चौहान ने नागरिकों के उत्तरदायित्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग दूसरों पर आरोप लगाते हैं, लेकिन उन्हें स्वयं भी जिम्मेदार बनना चाहिए। उन्होंने ट्रैफिक की समस्या पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कई लोग बिना पार्किंग व्यवस्था के एक से अधिक वाहन खरीद रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूल के समय होने वाले ट्रैफिक जाम के लिए केवल पर्यटक जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि स्थानीय नंबर वाले वाहन मुख्य कारण होते हैं। उन्होंने शहरीकरण की प्रक्रिया में संस्थागत जवाबदेही तय करने की मांग की ताकि समाज के कमजोर वर्गों को इसकी कीमत न चुकानी पड़े। इस अवसर पर शिमला के मेयर सुरिंदर चौहान, मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान, शिक्षा सचिव राकेश कंवर और होमगार्ड महानिदेशक सतवंत अटवाल सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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