भोपाल। मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब अपने सबसे निर्णायक और महत्वपूर्ण दौर में प्रवेश कर चुका है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने औपचारिक रूप से इस हाई-प्रोफाइल मामले की कमान संभाल ली है। सोमवार को सीबीआई ने भोपाल पुलिस द्वारा पूर्व में दर्ज की गई प्राथमिकी को फिर से दर्ज करते हुए मृतका के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। सीबीआई की स्पेशल क्राइम यूनिट की एक विशेषज्ञ टीम दिल्ली से भोपाल पहुंच चुकी है और उसने स्थानीय पुलिस से केस डायरी, मेडिकल रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्य और गवाहों के बयान सहित सभी भौतिक सबूत अपने कब्जे में ले लिए हैं।
सीबीआई ने यह मामला दहेज हत्या और प्रताड़ना से संबंधित गंभीर धाराओं के तहत दर्ज किया है। प्रारंभिक जांच में ऐसे कई तथ्य सामने आए थे जो दहेज की मांग और मानसिक उत्पीड़न की ओर इशारा करते हैं। सीबीआई की इस जांच में अब सारा ध्यान समर्थ सिंह द्वारा पुलिस को दिए गए बयानों और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों के बीच के विरोधाभासों पर टिक गया है। पुलिस हिरासत के दौरान समर्थ से लगभग 10 घंटों तक कड़ी पूछताछ की गई थी, जिसमें उसने कई ऐसे दावे किए थे जो परिवार के आरोपों और डिजिटल सबूतों से मेल नहीं खाते।
पूछताछ के दौरान समर्थ सिंह ने स्वीकार किया था कि ट्विशा के साथ उसके वैवाहिक संबंधों में तनाव था और अक्सर उनके बीच बहस होती थी, लेकिन उसने किसी भी प्रकार की शारीरिक हिंसा से साफ इनकार किया। समर्थ का कहना था कि ट्विशा के भाई की शादी के बाद से ही उनके बीच दूरियां बढ़ने लगी थीं। जांचकर्ताओं ने समर्थ से शादी से पहले की उनकी दोस्ती, वैवाहिक जीवन की शुरुआत और केवल पांच महीनों के भीतर पैदा हुए विवादों पर कड़े सवाल पूछे। समर्थ से यह भी पूछा गया कि क्या ट्विशा को उसकी मर्जी के खिलाफ ससुराल में रखा गया था।
मामले का सबसे संवेदनशील पहलू ट्विशा की गर्भावस्था और उसके बाद हुए गर्भपात से जुड़ा है। समर्थ ने पुलिस को बताया कि वह स्वयं पिता बनना चाहता था, लेकिन ट्विशा इसके लिए तैयार नहीं थी और उसी के दबाव में डॉक्टरी सलाह के बाद गर्भपात कराया गया। हालांकि, ट्विशा के व्हाट्सएप संदेशों से बिल्कुल अलग कहानी सामने आ रही है। संदेशों के अनुसार, समर्थ ने ट्विशा की प्रेग्नेंसी पर ही संदेह व्यक्त किया था और बच्चे के पिता होने पर सवाल उठाए थे। ट्विशा के परिवार का भी आरोप है कि वह बच्चा चाहती थी, लेकिन उसे मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित किया गया कि गर्भावस्था के दौरान उसका वजन 15 किलो तक कम हो गया।
समर्थ ने ट्विशा को ‘बाइपोलर डिसऑर्डर’ और ‘एडजस्टमेंट डिसऑर्डर’ जैसी मानसिक बीमारियों से पीड़ित बताने की कोशिश की और दावा किया कि वह खुद ही नींद की गोलियां लेती थी। लेकिन पुलिस अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि क्या ये दवाएं उसे बिना उसकी सहमति के या किसी साजिश के तहत तो नहीं दी जा रही थीं। सबसे संदिग्ध बात यह है कि समर्थ ने अपने मोबाइल फोन से ट्विशा और उसके परिवार के साथ हुई पूरी चैट हिस्ट्री को डिलीट कर दिया है। सीबीआई की तकनीकी टीम अब इन डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने की कोशिश कर रही है, जो इस मामले की सच्चाई सामने लाने में मुख्य कड़ी साबित हो सकते हैं।
जांच के घेरे में समर्थ की मां और सेवानिवृत्त जज गिरिबाला सिंह भी हैं। समर्थ का दावा है कि उनकी मां दोनों के बीच सुलह कराने की कोशिश करती थीं, जबकि ट्विशा के परिवार का मानना है कि गिरिबाला सिंह ने हमेशा अपने बेटे का साथ दिया और ट्विशा को नौकरी छोड़ने व घर में कैद रहने के लिए मजबूर किया गया। सीबीआई अब इन तमाम कड़ियों को जोड़कर यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि ट्विशा की मौत आत्महत्या थी या एक सुनियोजित साजिश। समर्थ के दावों और वास्तविक साक्ष्यों का मिलान ही इस रहस्यमयी मौत की गुत्थी सुलझाएगा।