चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब में चल रही नगर निकाय चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने या उसमें किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चूंकि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा 13 मई को ही की जा चुकी थी और वर्तमान में यह प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, इसलिए इस मोड़ पर किसी भी तरह का न्यायिक आदेश जारी करना उचित नहीं होगा।
चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया अब उस स्तर पर है जहां से पीछे नहीं हटा जा सकता। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 19 मई पहले ही समाप्त हो चुकी है और अब केवल मतदान की औपचारिक प्रक्रिया ही शेष रह गई है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित कानूनी सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि जब लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया एक उन्नत चरण में पहुंच जाती है, तो न्यायालयों को उसमें किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप से दूरी बनाए रखनी चाहिए।
खंडपीठ ने मौखिक रूप से यह भी कहा कि याचिकाकर्ता अपनी शिकायतों के साथ अदालत का दरवाजा खटखटाने में काफी देर कर चुके हैं। इस संवेदनशील समय पर यदि कोई आदेश पारित किया जाता है, तो उससे पूरी चुनावी प्रक्रिया बाधित हो सकती है। न्यायिक संयम की आवश्यकता पर जोर देते हुए अदालत ने कहा कि चुनाव कार्यक्रम प्रकाशित होने के बाद से अब तक काफी समय बीत चुका है और पूरी सरकारी मशीनरी मतदान की तैयारियों में जुटी हुई है।
सुनवाई के दौरान यह दलील दी गई कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या ईवीएम से जुड़ी चिंताओं को अब इस चरण में संबोधित नहीं किया जा सकता। हाई कोर्ट ने दोहराया कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई ऐतिहासिक फैसलों में यह व्यवस्था दी है कि चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद और प्रक्रिया शुरू होने पर अदालतों को दखल नहीं देना चाहिए, विशेषकर तब जब कानून में चुनाव के बाद शिकायतों के निपटारे के लिए वैकल्पिक वैधानिक उपाय पहले से ही मौजूद हों।
इन्हीं आधारों पर अदालत ने चुनाव प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। हालांकि, हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के अधिकारों को सुरक्षित रखते हुए उन्हें यह छूट प्रदान की है कि यदि उन्हें चुनाव के संचालन या परिणामों को लेकर कोई आपत्ति है, तो वे मतदान संपन्न होने के बाद कानून के अनुसार ‘चुनाव याचिका’ (इलेक्शन पिटीशन) दायर कर सकते हैं।
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता भविष्य में सक्षम मंच के समक्ष अपनी शिकायतों को उठाने के लिए स्वतंत्र हैं। इस निर्णय के साथ ही पंजाब में नगर निकाय चुनावों का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। हाई कोर्ट के इस आदेश को संवैधानिक मर्यादा बनाए रखने और चुनावी प्रक्रिया की निरंतरता को सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब राज्य निर्वाचन आयोग निर्धारित समय सीमा के भीतर मतदान की प्रक्रिया को निर्बाध रूप से पूरा कर सकेगा।
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