भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में हुई त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब एक नया मोड़ ले चुका है। इस चर्चित प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) से कराने की सिफारिश केंद्र सरकार को भेज दी है। राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में आवश्यक सहमति पत्र भी जारी कर दिया गया है। सरकार के इस बड़े कदम से मृतका के परिजनों को निष्पक्ष जांच और न्याय मिलने की उम्मीद काफी बढ़ गई है।
त्विषा शर्मा हत्याकांड और सुसाइड के बीच उलझे इस मामले की गूंज अब अदालती गलियारों में भी तेज है। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की एकलपीठ के समक्ष आरोपी पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। आरोपी का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मृगेंद्र सिंह ने दलील दी कि समर्थ पर लगाए गए सभी आरोप निराधार और झूठे हैं। बचाव पक्ष का मुख्य तर्क यह है कि जो वाट्सएप चैट साक्ष्य के तौर पर पेश की जा रही है, उसमें दहेज या प्रताड़ना जैसी कोई बात सामने नहीं आई है। साथ ही, उन्होंने यह भी आशंका जताई कि ऐसी डिजिटल चैट्स को आसानी से एडिट किया जा सकता है। सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने मामले की केस डायरी प्रस्तुत करने के लिए अदालत से समय मांगा, जिस पर कोर्ट ने डायरी मंगवाने के निर्देश जारी किए।
यह पूरा मामला सेवानिवृत्त जिला जज गिरिबाला सिंह के पुत्र समर्थ सिंह से जुड़ा हुआ है। समर्थ पर अपनी पत्नी त्विषा को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप है। त्विषा और समर्थ का रिश्ता एक वैवाहिक वेबसाइट के माध्यम से तय हुआ था और दिसंबर 2025 में दिल्ली में दोनों का विवाह संपन्न हुआ था। शादी के बाद 31 वर्षीय त्विषा भोपाल में अपने ससुराल में रहने लगी थी। कुछ दिनों पूर्व त्विषा का शव घर के भीतर संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटका हुआ मिला था। इस घटना ने तब और अधिक तूल पकड़ लिया जब यह जानकारी सामने आई कि मौत के समय त्विषा गर्भवती थी।
त्विषा के पिता ने अपनी शिकायत में स्पष्ट रूप से कहा है कि उनकी बेटी ने आत्महत्या नहीं की है, बल्कि उसकी हत्या करने के बाद साक्ष्यों को मिटाने के उद्देश्य से शव को फंदे पर लटकाया गया है। इसके विपरीत, समर्थ सिंह और उसकी मां गिरिबाला सिंह का कहना है कि त्विषा मानसिक रूप से अस्थिर थी और वह नशीले पदार्थों का सेवन करती थी। ससुराल पक्ष के अनुसार, इसी मानसिक स्थिति और कथित नशे की लत के कारण उसने यह आत्मघाती कदम उठाया।
मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से ही आरोपी समर्थ सिंह फरार चल रहा है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है और उसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए इनाम की राशि को 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 30 हजार रुपये कर दिया गया है। भोपाल की स्थानीय अदालत से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद ही समर्थ ने हाई कोर्ट की शरण ली है। अब सीबीआइ जांच की सिफारिश के बाद इस हाई-प्रोफाइल मामले के कई दबे हुए राज बाहर आने की संभावना है।
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